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डीएम ने एक्सईएन के खिलाफ भेजी कार्रवाई की संस्तुति 

Fri, 02 Jun 2017 12:26 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो/ मुजफ्फरनगर
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पाइप की जांच करते अधिकारी। - फोटो : अमर उजाला
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जल निगम के पाइप वजन घोटाले में सीडीओ की रिपोर्ट के बाद डीएम ने प्रथम दृष्टया दोषी पाते हुए एक्सईएन जल निगम के खिलाफ कार्रवाई के लिए शासन को संस्तुति कर दी है। प्रमुख सचिव नगर विकास को घोटाले की उच्चस्तरीय जांच कराने के लिए भी रिपोर्ट प्रेषित की है, जिससे पूरे प्रदेश में पाइप वजन घोटाला सामने आ सके। डीएम की कार्रवाई के बाद जल निगम में हड़कंप मच गया है। स्टॉक से जुड़े सभी अधिकारियों और कर्मचारियों पर गाज गिरना तय माना जा रहा है।       
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डीएम गौरी शंकर प्रियदर्शी ने जल निगम के घोटाले को गंभीरता से लिया है। उन्होंने सीडीओ अंकित अग्रवाल से रिपोर्ट मिलने के बाद जल निगम के अधिकारियों को प्रथम दृष्टया दोषी माना है। शासन को इस संबंध में रिपोर्ट भेजते हुए एक्सईएन जल निगम रामहेत सिंह के खिलाफ कार्रवाई की संस्तुति की है। प्रमुख सचिव नगर विकास को पाइप घोटाले की उच्चस्तरीय जांच कराने के लिए लिखा है। डीएम ने अपनी रिपोर्ट में लिखा है कि मुजफ्फरनगर जनपद की तरह अन्य जिलों में भी पाइप वजन घोटाला सामने आ सकता है। पाइप सप्लाई करने वाली कंपनी पूरे प्रदेश में सप्लाई कर रही है।

 डीएम द्वारा शासन को रिपोर्ट भेजे जाने के बाद से जल निगम में हड़कंप मचा है। स्टॉक से जुडे़ अधिकारियों और कर्मचारियों पर गाज गिरना तय माना जा रहा है। सीडीओ अंकित अग्रवाल ने बताया कि पाइप वजन घोटाला गंभीर मामला है। इस कारण डीएम जीएस प्रियदर्शी ने शासन को पूरे मामले से अवगत करा दिया है। जलनिगम के एक्सईएन रामहेत सिंह का कहना है कि पाइप के कम वजन के लिए कंपनी जिम्मेदार है, उन्होंने भी कंपनी के खिलाफ कार्रवाई करने के लिए अपने मुख्यालय को लिख दिया है। इस पूरे मामले में उनका कोई दोष नहीं है।       
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पेट्रोल पंपों की तरह लग सकते हैं छापे      
मुजफ्फरनगर। डीएम जीएस प्रियदर्शी ने लखनऊ में पेट्रोल पंपों में चिप लगाकर घटतौली का मामला पकड़ा था, जिसके बाद पूरे प्रदेश में छापेमारी हुई। सभी जिलों में पंपों पर घटतौली पकड़ी गई थी। पाइप वजन घोटाला भी ऐसा ही मामला है। मुजफ्फरगनर जिले के बाद अन्य जनपदों में भी यदि पाइप का वजन चेक होता है तो यह घोटाला सामने आ सकता है।       

दिनभर घनघनाते रहे अधिकारियों के फोन 
जल निगम का पाइप वजन घोटाला सामने आते ही सप्लाई करने वाली कंपनी से लेकर लखनऊ में बैठे अफसरों में हड़कंप मच गया। जिले में जांच कर रहे अफसरों के फोन दिनभर घनघनाते रहे। घोटाले में कंपनी के घिर जाने से लखनऊ में बैठे अफसरों पर भी सवाल खड़े हो गए हैं। पूरे में प्रदेश में यह 100 करोड़ से अधिक का घोटाला होने का अनुमान लगाया जा रहा है।       

जल निगम का पाइप वजन घोटाला जल निगम से जुड़े लखनऊ में बैठे अफसरों के गले की फांस बन सकता है। सूत्रों की माने तो यह घपला सपा शासनकाल से चला आ रहा है। डीएम गौरी शंकर प्रियदर्शी द्वारा पाइप के वजन की जांच कराए जाने के बाद सनसनीखेज सच सामने आया। बुधवार को मामला उजागर होने के बाद सप्लाई करने वाली कंपनी विशाल पाइप लिमिटेड के अधिकारियों और मालिकों की नींद उड़ गई है।

बृहस्पतिवार को जांच में शामिल अधिकारियों के फोन दिनभर घनघनाते रहे। लखनऊ के अफसर भी मामले में कार्रवाई की जानकारी लेते रहे। जल निगम के अफसर भी स्थिति पर निगाहें रखे रहे। सभी जिलों में जल निगम में सप्लाई किए गए पाइप की जांच होती है तो बड़ा घोटाला सामने आ सकता है।

सूत्रों की माने तो जो स्थिति जनपद में मिली है, सभी जिलों में यही स्थिति है। इस मामले में नगर विकास विभाग से जुड़े रहे वे अधिकारी भी लपेटे में आएंगे, जो कंपनी को सप्लाई दिलाने में सहायक रहे हैं। प्रदेशभर में यह 100 करोड़ से ऊपर का घपला होने का अनुमान लगाया जा रहा है। पाइप सील होने के कारण कंपनी मालिकों और अफसरों की नींद गायब हो चुकी है।       

रेजिन और कैल्शियम का खेल      
मुजफ्फरनगर। पाइप निर्माण में रेजिन और कैल्शियम का इस्तेमाल होता है। रेजिन काफी महंगा और कैल्शियम के रेट बहुत कम हैं। मजबूत प्लास्टिक वही होती हैं, जिसमें रेजिन अधिक होता है। रेजिन कम होने पर पाइप टूट जाएगा। पाइप बनाने वाले कंपनी रेजिन कम डालकर पैसा बचाने का खेल करती है, जिससे पाइप की क्वालिटी घटिया हो जाती है। इसमें भी बड़ा खेल है।       
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