मुजफ्फरनगर में वर्ष 2013 में हुए दंगों के मुकदमों में समझौता कराने के लिए बुलाई गई पंचायत में वक्ताओं ने कहा कि प्रशासन की चूक और कुछ राजनीतिज्ञों ने नफरत की खाई पैदा की, लेकिन अब इसे भूलकर आगे बढ़ने कोशिश की जाए।
आपसी सौहार्द को कायम करने के लिए दोनों पक्ष एक-दूसरे को गले लगाएं। साथ ही भविष्य के लिए सचेत किया गया। सांप्रदायिकता बांटने वालों को मुंह तोड़ जवाब दिया जाए। पंचायत में दोनों पक्षों के लोग शामिल हुए।
दंगा समझौता समिति ने रविवार को शहर में एक बैंक्वेट हॉल में पंचायत का आयोजन किया। दंगा पीड़ितों के साथ दोनों पक्षों के लोगों को बुलाया गया। वर्ष 2013 के दंगे में 470 विभिन्न मुकदमे चल रहे हैं, जिनमें 1600 से अधिक लोगों को आरोपी बनाया गया है।
इन मुकदमों को समझौता के जरिये खत्म करने के लिए पहल की गई है। पूर्व सांसद कादिर राना ने कहा कि प्रशासन की चूक के कारण जनपद दंगे की आग में झुलसा। नफरतों को भुलाकर अब एक-दूसरे को गले लगाया जाए। रालोद जिलाध्यक्ष अजीत राठी ने कहा कि दंगे में दोनों पक्षों को बड़ा नुकसान हुआ है।
दोनों पक्षों को सांप्रदायिक ताकतों को मुंहतोड़ जवाब देने के लिए एक होना पड़ेगा। पूर्व मंत्री कुलदीप उज्ज्वल ने कहा कि समझौता होना एक अच्छी पहल है, इसके लिए दोनों समाज के वरिष्ठ लोगों को आगे बढ़कर भाग लेना होगा। पूर्व सांसद हरेंद्र मलिक ने कहा कि सियासी लाभ के लिए जिले में दंगा कराया गया था।
अब समाधान निकालने का वक्त है, इसके लिए पीड़ित और जिम्मेदार लोगों को एक मंच पर आना होगा। भाकियू के राष्ट्रीय अध्यक्ष चौधरी नरेश टिकैत ने कहा कि सरकार और प्रशासन ने स्थितियों को नहीं समझा और बात आगे बढ़ गई। फसाद से दोनों पक्षों का नुकसान होने के साथ वर्षों का भाईचारा, एकता टूटकर बिखर गई।
अब इसे सहजने का समय है। दोनों पक्षों का यह समझना होगा। इसके अलावा गुलाम मोहम्मद जौला, बतीसा खाप से बाबा सूरजमल, थांबेदार मांगेराम, बाबा सौदान सिंह, तालान खाप के सुधीर तालान, चौधरी ओमबीर तोमर, मोहम्मद जकी, पूर्व विधायक नवाजिश आलम, पूर्व जिला पंचायत अध्यक्ष तिरसपाल मलिक, कृष्णपाल तोमर, वरिष्ठ अधिवक्ता चंद्रवीर सिंह सतवीर, सुमन सिंह बालियान आदि ने भी अपने विचार रखे। पंचायत के आयोजक विपिन बालियान रहे। अध्यक्षता भाकियू अध्यक्ष चौधरी नरेश टिकैत ने और संचालन राशिद अजीम ने किया।
जान बूझकर बढ़ाया था फसाद
मुजफ्फरनगर। पंचायत में कवाल के मृतक शाहनवाज कुरैशी के चाचा हाजी नसीम ने कहा कि प्रकरण को जबरन बढ़ाया गया और हिंसा फैलाई गई। झगड़े अक्सर होते हैं, जैसा कवाल कांड को रूप दिया गया। दुनिया में कहीं ऐसा नहीं हुआ होगा। समझौता होना वक्त की मांग है, लेकिन दंगे के असल गुनहगारों पर कार्रवाई होनी जरूरी है।