फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

‘कम उम्र की नर्सरी से बढ़ेगी धान की पैदावार’

विज्ञापन
डा. पीके सिंह प्राचार्य कृषि विज्ञान केंद्र बघरा - फोटो : MUZAFFARNAGAR
विज्ञापन
‘कम उम्र की नर्सरी से बढ़ेगी धान की पैदावार’
विज्ञापन

मुजफ्फरनगर। धान की नर्सरी तैयार कर निरोगी बीज की बुवाई से बेहतर उत्पादन मिलेगा। नर्सरी के बाद एक सप्ताह के अंदर रोपित करने से उत्पादन में इजाफा होगा। अनुकूल मौसम में नर्सरी की कम उम्र में बुवाई से उत्पादन में 30-35 प्रतिशत बढ़ोतरी होती है। कृषि विज्ञान केंद्र बघरा के प्राचार्य एवं अध्यक्ष डॉ. पीके सिंह ने धान की पैदावार बढ़ाने के टिप्स दिए।
डॉ. पीके सिंह ने बताया खरीफ मौसम की धान प्रमुख फसल है। संकर धान की नर्सरी 18-21 और सामान्य प्रजातियों की 22-23 दिन में तैयार हो जाती है। नर्सरी तैयार होने के एक सप्ताह के अंदर धान रोपित करना बेहतर है। इस विधि से पौधों के कल्लों का संख्या बढ़ती है। एक हेक्टेयर खेत में दो दिन सूखी जुताई और दो दिन पानी भरने के साथ जुताई करना माकूल होगा। सड़ी या हरी खाद को पहली अथवा दूसरी जुताई में बिखेर दें। आखिरी जुताई में चार किलो यूरिया, 10 किलो सिंगल सुपर फास्फेट, पांच किलो न्यूरेट पोटाश और दो किलो सल्फेट का मिश्रण उचित है। बीज शोधन नर्सरी डालने से पहले करें। 25 किलो बीज को रात भर पानी में भिगोकर रखें।
विज्ञापन

उन्होंने बताय कि छाया में सूखाकर अंकुरित बीज नर्सरी में डाला जाए। एक हेक्टेयर में महीन धान का 30 किलो, मध्यम का 35 और मोटे धान का 40 किलो बीज पर्याप्त होगा। नर्सरी में 3-4 दिन बाद खरपतवार प्रबंधन के लिए प्रेटिलाक्लोर का सवा लीटर एक हेक्टेयर में डालना उचित है। इससे बीज निरोगी होगा।
विज्ञापन

वेस्ट यूपी में बासमती की 14 प्रमुख प्रजाति
डॉ. पीके सिंह ने बताया बासमती धान की प्रजातियों में वल्लभ-21, 22, 23, 24, पूसा बासमती-1692, 1612, 1609, 1, 1728, 1718, 1637, 1121, 1509, 1401 प्रमुख है। इनको रोपित करने से औसत उपज प्रति हेक्टेयर 43 से 52 क्विंटल तक आ जाती है। इनकी पकने की औसत आयु तीन से चार महीने हैं।
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें