दूधली गोगा म्हाड़ी पर नहीं सजा मेला
मुजफ्फरनगर, चरथावल। दूधली ऐतिहासिक म्हाड़ी पर कोविड की बंदिश के कारण तीन दिवसीय मेला नहीं सजा। शासन की गाइडलाइन के कारण गोगा के जयकारों की गूंज खामोश रही। गांव में आज के दिन बागड़ वाले कि जय, नीले घोड़े की जय.. के जयकारे नहीं सुनने का मलाल गांव के अलावा आसपास के लोगों को हमेशा रहेगा। इस बार बाहरी प्रांतों के अलावा गांव वालों का प्रसाद नहीं चढ़ने से दूधली म्हाड़ी के लिए कोराना वैश्विक महामारी वर्ष इतिहास बना गया।
चरथावल क्षेत्र के दूधली गांव में स्थित करीब 500 साल पुरानी ऐतिहासिक गोगा म्हाड़ी की मान्यता राजस्थान के बागड़ की म्हाड़ी के बाद मानी जाती है। इस वर्ष कोविड की बंदिश के कारण यहां मेला स्थगित कर दिया गया था। इसी कारण कई प्रांतों से आने वाले लाखों श्रद्धालु दूधली नहीं पहुंच पाए। बृहस्पतिवार को लगने वाले मेले की नियत तिथि थी। प्रशासन के प्रतिबंध के कारण आलमगीपुर मरुआ के पांच परिवारों की व्रतधारी महिलाएं और पुजारियों ने म्हाड़ी प्रांगण में पवित्र समाधि पर प्रसाद और दीपक प्रज्ज्वलित कर मत्था टेका। अल सुबह चार बजे से पहले इन लोगों ने सोशल डिस्टेंसिंग के साथ परंपरा निभाई। सुबह पांच बजे बिरालसी चौकी प्रभारी संदीप कुमार पुलिस बल के साथ म्हाड़ी स्थल पर पहुंच गए। पुलिस के साथ ग्राम प्रधान पति रविंद्र पुंडीर कार्यकर्ताओं के साथ सतर्कता बनाने को म्हाड़ी परिसर में मौजूद रहे। प्रधान पति ने बताया मुख्य द्वार खुला रहा, पर समाधि मंदिर का द्वार नहीं खोला गया। गांव में पुलिस की ड्यूटी रही। शासन की गाइडलाइन के कारण श्रद्धालु प्रसाद नहीं चढ़ा पाए। इस कार्य में कमेटी के लोगों के अलावा ग्राम पंचायत ने सहयोग किया। ग्रामीण महेंद्र सिंह, रामभूल सिंह पुंडीर, रामकुमार, आदेश पुंडीर आदि का कहना है कोविड महामारी में सैकड़ों साल बाद दूरदराज से आने वाले श्रद्धालु और ग्रामीण पावन समाधि के दर्शन से वंचित रह गए।