कहा कि यह सरकार की रणनीति के तहत हुआ है कि एक आदमी लाल किले पर अपना झंडा फहरा जाता है और सरकार उसे आराम से निकाल देती है। सरकार की यह यह एक साजिश है किसानों को बर्बाद करने की।
सरकार ने किसानों और किसान नेताओं पर जो मुकदमे लगाए हैं हम उन मुकदमों को झेलने के लिए तैयार हैं, अगर जेल भी जाना पड़ेगा किसान के हक की लड़ाई के लिए हम जेल भी जाएंगे, हम कभी भी किसानों के लिए हर मुकदमे झेलने के लिए तैयार हैं।
सरकार ने सभी धरनास्थलों पर अपने आदमी भेज कर हम पर दबाव बनाना शुरू कर दिया है कि धरनास्थल खाली करो। इससे पहले कि माहौल और बिगड़ जाए और हम पर कोई आरोप लगे हम आज ही गाजीपुर बॉर्डर से अपना धरना समाप्त करते हैं। हम किसी नेता का विरोध नहीं करेंगे और समय का इंतजार करेंगे।
उन्होंने पंचायत में आगे की रणनीति के लिए दो दिन का समय मांगा था। कहा कि किसान को खत्म करने की जो साजिश सरकार ने चली है वो हम क़भी सफल नही होने देंगे। पंचायत में धरना वापस लेने की घोषणा के बाद कुछ घंटे बाद ही गाजीपुर बॉर्डर पर हुए घटनाक्रम के बाद भाकियू ने अपनी रणनीति बदल दी।
भाकियू अध्यक्ष चौधरी नरेश टिकैत ने धरना समाप्त करने की घोषणा को वापस ले लिया। देर रात को उन्होंने किसान भवन में फिर से किसानों की आपात पंचायत बुला ली। उन्होंने बताया कि हम शांति से धरना खत्म रहे थे, मगर सरकार ने हमारे इस निर्णय को पलटवा दिया है। अब आंदोलन जारी रहेगा।
मुजफ्फरनगर जनपद में महापंचायत का ऐलान होने के बाद मेरठ पुलिस ने सिवाया टोल पर फोर्स तैनात कर दी। हालांकि देर रात तक मुजफ्फरनगर की ओर से कोई भी ट्रैक्टर या किसान नहीं आता दिखाई दिया।
गाजीपुर बॉर्डर को खाली कराने के लिए भारतीय प्रवक्ता राकेश टिकैत को उठाने का प्रयास किया गया। जिस पर वह भावुक हो गए। राकेश टिकैत का वीडियो वायरल होने के बाद मुजफ्फरनगर में खलबली मच गई। सोशल मीडिया पर राकेश टिकैत का वीडियो वायरल होने के बाद वहां की स्थानीय लोगों ने दिल्ली में कूच करने का ऐलान भी कर दिया। इसकी जानकारी लगने पर मेरठ पुलिस ने सिवाया टोल पर पुलिस फोर्स लगा दिया। टोल पर दौराला पल्लवपुरम परतापुर समेत कई थानों की पुलिस फोर्स लगी हुई है।
एसपी सिटी डॉक्टर अखिलेश नारायण सिंह का कहना है कि सुरक्षा की दृष्टि को देखते हुए सिवाया टोल पर पुलिस का पहरा लगाया गया है। हालांकि देर रात तक मुजफ्फरनगर से कोई भी ट्रैक्टर या फिर किसान आता नहीं दिखाई दिया। पुलिस का कहना है कि किसी भी हालत में गाजीपुर बॉर्डर पर किसान को जाने नहीं दिया जाएगा।
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