फुगाना थाना क्षेत्र के एक गांव में महिला ने पड़ोस की किशोरी को चाय बनाने के बहाने बुलाया था। इसके बाद उसके भतीजे ने कमरे में ले जाकर दुष्कर्म का प्रयास किया। पुलिस ने दोषी चाची-भतीजे को दस-दस साल की सजा दी है।
सात साल पहले फुगाना थाना क्षेत्र के गांव में पड़ोस की किशोरी को चाय बनाने के बहाने घर बुलाकर दुष्कर्म के प्रयास के मामले में दोषी चाची और रिश्ते के भतीजे को 10-10 साल कारावास की सजा सुनाई गई है। अपर जिला एवं सत्र न्यायालय/विशेष न्यायालय (पॉक्सो एक्ट) संख्या-1 की पीठासीन अधिकारी मंजुला भालोटिया ने फैसला सुनाया।
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पीड़िता के भाई ने 29 मई 2019 को फुगाना थाने में प्राथमिकी दर्ज कराई थी। आरोप लगाया था कि पड़ोसी महिला ने 27 मई को उसकी नाबालिग बहन को दोपहर के समय चाय बनाने के बहाने घर बुलाया। इसके बाद घर में पहले से ही मौजूद युवक के साथ बहन को कमरे में बंद कर दिया।
आरोपी ने बहन के साथ दुष्कर्म का प्रयास किया। परिवार को जान से मारने की धमकी दी गई। पीड़िता ने किसी तरह घर पहुंचकर अपनी मां को मामले की जानकारी दी, जिसके बाद आरोपी महिला और रिश्ते में उसके भतीजे के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कराई गई। पुलिस ने दोनों के खिलाफ आरोपपत्र दाखिल किया।
प्रकरण की सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष ने छह और बचाव पक्ष ने एक गवाह पेश किया। बचाव पक्ष ने कहा कि 37 हजार रुपये के लेन-देन और कूड़ा डालने के विवाद में आरोप लगाया गया है। अदालत ने दोनों आरोपियों पर दोष सिद्ध हो गया।
शुक्रवार को दोनों को दुष्कर्म के प्रयास और साजिश रचने के मामले में 10-10 साल के कारावास और 20-20 हजार रुपये अर्थदंड की सजा सुनाई गई। विशेष लोक अभियोजक विनय अरोरा और विक्रांत राठी ने बताया कि अर्थदंड की कुल धनराशि 55 हजार रुपये पीड़िता को बतौर प्रतिकर दी जाएगी।
फैसले में स्थापित करना होता है न्याय संगत संतुलन
अपर जिला एवं सत्र न्यायालय/विशेष न्यायालय (पॉक्सो एक्ट) संख्या-1 की पीठासीन अधिकारी मंजुला भालोटिया ने फैसले में लिखा कि दंडादेश पारित करते समय न्यायालय को अपराध की गंभीरता, समाज पर उसके प्रभाव, पीड़िता की मानसिक वेदना और अभियुक्त के व्यक्तिगत परिस्थितियों एवं पुनर्वास की संभावनाओं के मध्य एक न्यायसंगत संतुलन स्थापित करना होता है। न्याय की मांग है कि दण्ड न तो अत्यधिक प्रतिशोधात्मक हो और न ही इतना अपर्याप्त कि वह विधि के निवारक प्रभाव को समाप्त कर दे।
सजा के सवाल पर यह बोला अभियोजन
सहायक जिला शासकीय अधिवक्ता (फौजदारी) ने दण्ड के बिंदु पर तर्क प्रस्तुत करते हुए कहा कि अभियुक्त की ओर से कारित किया गया अपराध अत्यंत घृणित, समाज-विरोधी और एक असहाय अवयस्क बालिका की अस्मिता को रौंदने वाला है। अभियुक्ता ने पड़ोस की महिला और चाची के पवित्र विश्वास का हनन करते हुए एक षड्यंत्रकारी की भूमिका निभाई और बालिका को नरपिशाच के हवाले कर दिया। समाज में बालिकाओं की सुरक्षा और विधि के भय को स्थापित करने हेतु ऐसे अपराधियों के प्रति किसी भी प्रकार की उदारता बरतना न्यायोचित नहीं होगा।