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मुजफ्फरनगर: पिता के सामने ही कर दी पुत्र की हत्या, एक ही परिवार के पांच हत्यारों को कोर्ट ने दी ये सजा

Sun, 18 Oct 2026 12:10 PM IST
Mohd Mustakim अमर उजाला नेटवर्क, मुजफ्फरनगर

सार

मंसूरपुर क्षेत्र में छह साल पहले विपिन की तमंचे से गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। कोर्ट ने एक ही परिवार के पांच लोगों को आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। वहीं छह साल की बच्ची से गलत करने वाले को भी उम्रकैद दी है। किशोरी से दुष्कर्म में सौतेले माता-पिता को 20-20 साल की सजा सुनाई है। 
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सांकेतिक तस्वीर। - फोटो : adobestock
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विस्तार
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मंसूरपुर थाना क्षेत्र के पुरबालियान गांव के किसान विपिन (28) की तमंचे से गोली मारकर हत्या के मामले में एक ही परिवार के पांच दोषियों को आजीवन कारावास की सजा सुनाई गई। दोषियों में पिता-पुत्र के अलावा दो सगे भाई भी हैं। जमीन के विवाद में कहासुनी के बाद हत्या की वारदात अंजाम दी गई थी। अपर सत्र न्यायालय संख्या-1 की पीठासीन अधिकारी गरिमा सिंह-1 ने फैसला सुनाया। दोषियों ने अपने छोटे बच्चों और परिवार का हवाला देकर सजा में राहत चाही। अदालत ने कहा कि अभियुक्तों को यह महसूस करना चाहिए कि उनके द्वारा वादी के सामने ही उसके जवान पुत्र की हत्या की गई। वादी को कितना अकल्पनीय कष्ट पहुंचा होगा।
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वादी कंवरपाल ने 28 अक्तूबर 2020 को मंसूरपुर थाने में प्राथमिकी दर्ज कराई थी। पीड़ित ने बताया कि सुबह नौ बजे उसका बेटा विपिन घर के पास चौक पर बैठा हुआ था। इस बीच पड़ोसी धनसेठ पक्ष के लोगों ने लाठी-डंडों और तमंचों से हमला बोल दिया। मौके पर ही गोली मारकर विपिन की हत्या कर दी, जबकि बीच-बचाव के लिए आया भतीजा अंकित घायल हो गया था।
पुलिस ने आरोपी धनसेठ उर्फ धर्मेंद्र, उसके बेटे राजा, दो सगे भाई पविंद्र एवं रविंद्र के अलावा नितिन उर्फ अवि के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की। आरोपियों को मुठभेड़ में गिरफ्तार कर चालान कर दिया गया था। जांच के बाद अदालत में आरोपपत्र दाखिल किया गया।
 

शनिवार को आरोपी अदालत में पेश हुए। दोष सिद्ध होते ही उन्हें न्यायिक अभिरक्षा में ले लिया गया। अदालत ने हत्या में आजीवन कारावास और 50-50 हजार रुपये अर्थदंड, जानलेवा हमले में 10-10 साल कारावास और 25-25 हजार रुपये अर्थदंड की सजा सुनाई गई। डीजीसी राजीव शर्मा ने बताया कि दोषी धनसेठ और राजा को आयुष अधिनियम में दो-दो साल कारावास और 10-10 हजार रुपये अर्थदंड की सजा सुनाई गई। अभियोजन पक्ष ने आठ गवाह पेश किए।
 

आंखों के सामने बेटे की हत्या देखना दर्दनाक रहा होगा : अदालत
अदालत ने महेश बनाम मध्य प्रदेश, बचन सिंह बनाम पंजाब और मच्छी सिंह बनाम पंजाब की रूलिंग का हवाला देकर केस का निष्कर्ष दिया। लिखा कि यदि अभियोजन के तर्कों पर विचार करें तो मृतक नवयुवक था, उसकी हत्या पिता के सामने की गई। निश्चित तौर पर किसी भी पिता के लिए इस प्रकार से अपने जवान पुत्र की हत्या अपनी आंखों के सामने होते हुए देखना एक दर्दनाक अनुभव रहा होगा, जिससे शायद वह अपने शेष जीवन में भी न उबर सके। दोष सिद्ध अपराधियों ने यह आधार दिया कि उनके छोटे बच्चे और घर परिवार है, जिस कारण उनके प्रति सहानुभूति पूर्ण रवैया अपनाया जाए। अभियुक्तगण को यह महसूस करना चाहिए कि उनके द्वारा वादी के सामने ही उसके जवान पुत्र की हत्या की गई। वादी को कितना अकल्पनीय कष्ट पहुंचा होगा।

छह साल की मासूम से दरिंदगी के दोषी को आजीवन कारावास
छपार थाना क्षेत्र में लैंगिक अपराधों से बालकों का संरक्षण अधिनियम 2012 की धारा 5(एम) 6 के मामले में अदालत ने दोषी को आजीवन कारावास की सजा सुनाई। छह साल की बच्ची के साथ घिनौनी हरकत के मामले में फैसला आया। विशेष न्यायालय पॉक्सो एक्ट के पीठासीन अधिकारी मनोज कुमार सिद्धू ने दोषी को वारदात के सिर्फ 181 दिन बाद सजा सुनाई।
वारदात इसी साल 19 अप्रैल को हुई और अगले दिन प्राथमिकी दर्ज कराई गई थी। वादी ने पुलिस को बताया था कि छह साल की मासूम गांव में परचून की दुकान में खाने का सामान लेने गई थी। रास्ते में पड़ोस का ही आरोपी उसे बहलाकर अपने साथ जंगल में ले गया और घिनौनी हरकत की।
 

पुलिस ने आरोपी को गिरफ्तार कर चालान कर दिया था। प्रकरण की सुनवाई विशेष न्यायालय पॉक्सो एक्ट में हुई। अभियोजन की ओर से आठ गवाह पेश किए गए। सहायक शासकीय अधिवक्ता प्रदीप बालियान और दिनेश शर्मा ने बताया कि अदालत ने शनिवार को दोषी को सजा सुनाई।
बालकों का संरक्षण अधिनियम 2012 की धारा 5(एम) 6 के मामले में शेष प्राकृतिक जीवनकाल के लिए आजीवन कारावास और 20 हजार रुपये के अर्थदंड की सजा सुनाई। बीएनएस की धारा 137 (2) में पांच साल का कारावास और पांच हजार रुपये अर्थदंड की सजा सुनाई गई। अर्थदंड की धनराशि 25 हजार रुपये पीड़िता को बतौर प्रतिकर दी जाएगी। एसपी क्राइम इंदु सिद्धार्थ ने बताया कि प्रकरण में पुलिस ने अदालत में पैरवी की। साक्ष्य कराने में जहां भी जरूरी हुआ सहयोग कराया गया।
 

किशोरी से दुष्कर्म में सौतेले माता-पिता को 20-20 साल की सजा
पांच साल पहले भोपा थाना क्षेत्र में किशोरी के साथ दुष्कर्म, उत्पीड़न और देह व्यापार कराने के मामले में सौतेले पिता और सौतेली मां को 20-20 साल कारावास की सजा सुनाई गई। विशेष न्यायालय पॉक्सो एक्ट-प्रथम की पीठासीन अधिकारी मंजुला भालोटिया ने फैसला सुनाया। दोषी मां की वीडियो कांफ्रेंसिंग के जरिये पेशी कराई गई।

किशोरी ने भोपा थाने में छह अक्तूबर 2021 को प्राथमिकी दर्ज कराई थी। आरोप लगाया था कि सौतेले पिता सतीश ने उसके साथ दुष्कर्म किया। इसके अलावा मां ने दूसरे लोगों से रुपये लेकर भी गलत कार्य कराया गया। विरोध करने पर मां उसकी पिटाई करती थी। मां बबली पर साजिश रचने और अनैतिक काम का दबाव, उत्पीड़न, मारपीट का आरोप लगाया था।
 
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पुलिस ने दोनों आरोपियों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की। विशेष लोक अभियोजक विक्रांत राठी और दीपक गौतम ने बताया कि प्रकरण में सात गवाह पेश किए गए। पीड़िता ने अदालत में प्राथमिकी को पुष्टि किया और दोनों आरोपियों के खिलाफ गवाही दी।
शुक्रवार को अदालत ने दोनों पर दोष सिद्ध किया था। शनिवार को दोषी सतीश को पुलिस सुरक्षा के बीच कोर्ट में पेश किया गया, जबकि सह अभियुक्त की जिला कारागार से पेशी वीडियो कांफ्रेंसिंग के जरिये कराई गई। अदालत ने दोनों दोषियों को 20-20 साल की सजा और 52-52 हजार रुपये का अर्थदंड लगाया है। सौतेली मां को अदालत ने साजिश रचने का दोषी भी पाया।
 
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