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Muzaffarnagar: एसडीएम जानसठ जयेंद्र सिंह सस्पेंड, 750 बीघा जमीन रिश्वत लेकर नाम करने के मामले में एक्शन

Thu, 11 Sep 2025 08:11 PM IST
मोहम्मद मुस्तकीम अमर उजाला नेटवर्क, मुजफ्फरनगर

सार

डेरावाल कॉर्पोरेटिव फार्मिंग सोसायटी की जमीन को रातों-रात एक किसान के नाम करने का आरोप लगाया गया था। डीएम ने एसडीएम जयेंद्र सिंह के खिलाफ जांच बैठा दी थी, जिसमें प्रथम दृष्टया उन्हें दोषी पाया गया है।
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एसडीएम जानसठ जयेन्द्र सिंह। - फोटो : अमर उजाला
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जानसठ तहसील में 750 बीघा सरकारी जमीन के घोटाले में बड़ा एक्शन लेते हुए एसडीएम जयेंद्र सिंह को सस्पेंड कर दिया गया है। भाजपा के पूर्व विधायक विक्रम सैनी ने भी उनके खिलाफ शिकायत कर भ्रष्टाचार के आरोप लगाये थे। डेरावाल कॉर्पोरेटिव फार्मिंग सोसायटी की जमीन को कथित रूप से रातों-रात निजी नामों में दर्ज किए जाने के मामले में जिलाधिकारी ने जांच बैठाई थी। जांच में प्रथम दृष्टया गड़बड़ी पाए जाने के बाद यह कार्रवाई की गई है। प्रशासन की इस सख्ती से राजस्व विभाग में हड़कंप मचा हुआ है।
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मुजफ्फरनगर जनपद की जानसठ तहसील से एक बड़ा भूमि घोटाला सामने आया है, जिसमें वर्तमान एसडीएम जयेंद्र सिंह पर अरबों की सरकारी जमीन किसान के नाम करने का गंभीर आरोप लगा है। यह मामला गांव इसहाकवाला में स्थित सरकारी जमीन से जुड़ा है, जहां 1962 में डेरावाल कॉर्पोरेटिव फार्मिंग सोसायटी की स्थापना की गई थी। सोसायटी के पास करीब 900 बीघा जमीन थी।
 

तहसील प्रशासन हाईकोर्ट तक ले गया था मामला
इस जमीन को लेकर लंबे समय से सोसायटी के सदस्य जीवन दास के बेटे गुलशन और हरबंस (जो 1972 में अलग हो गए थे) के पोते के बीच विवाद चला आ रहा था। वर्ष 2018 में तहसील प्रशासन ने स्वयं हाईकोर्ट को सूचित किया था कि हरबंस का इस जमीन से कोई संबंध नहीं है। बावजूद इसके मार्च 2024 में एसडीएम पद पर तैनात हुए जयेंद्र सिंह ने मामले की सुनवाई फिर से शुरू की।

रातों-रात बदला आदेश, किसान के नाम जमीन
19 जुलाई 2025 को एसडीएम ने अचानक आदेश जारी कर 600 बीघा सोसायटी की और 150 बीघा सरकारी जमीन हरबंस के नाम से किसान के नाम कर दी। जैसे ही इसकी जानकारी सोसायटी के सदस्य गुलशन को हुई, उन्होंने अपने बेटे ईशान के साथ 29 जुलाई को डीएम उमेश मिश्रा से मिलकर शिकायत की। डीएम ने तत्परता दिखाते हुए एडीएम के नेतृत्व में तीन सदस्यीय जांच टीम बना दी थी। 
 

इसके बाद एसडीएम जयेंद्र सिंह ने रातों-रात अपने ही दिए आदेश को निरस्त कर दिया। जांच टीम ने मामले की तह तक जाकर तथ्यों की पुष्टि करते हुए डीएम को रिपोर्ट सौंप दी थी। इसके बाद शिकायतकर्ता भी डीएम से मिले और कार्यवाही की मांग की थी। बताया गया है कि यह जमीन हाईवे के बिल्कुल सामने स्थित है, जिस पर पहले ही सोसायटी और किसान ने मुआवजे की मांग को लेकर हाईकोर्ट का रुख किया था। 
 
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कोर्ट ने उस जमीन को सरकारी मानते हुए मुआवजा देने से इनकार कर दिया था। इसके बावजूद एसडीएम जयेंद्र सिंह सिंह द्वारा वही जमीन कागजों में निजी नाम पर दर्ज कर दी गई थी। प्रशासनिक सूत्रों ने बताया कि इसमें दोष साबित होने पर शासन ने जिलाधिकारी की रिपोर्ट पर एसडीएम जयेन्द्र सिंह को सस्पेंड कर दिया है।

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