बेटे की चाह में एक के बाद एक सात बेटियों का जन्म हुआ। चाहत अधूरी रही तो परिवार में कलेश रहने लगा। एक तरफ बेटे की चाह और दूसरी तरफ मुफलिसी में गुजर रही जिंदगी से परेशान होकर मजदूर ने फांसी का फंदा लगाकर आत्महत्या कर ली। गमजदा परिवार ने मृतक का गुपचुप तरीके से अंतिम संस्कार कर दिया।
मुजफ्फरनगर में थाना क्षेत्र के गांव बिरालसी निवासी करीब 35 वर्षीय मजूदर युवक की आर्थिक स्थिति खराब थी। करीब दो महीने पहले उसकी पत्नी ने दो जुड़वां बेटियों को जन्म दिया था। कोई बेटा नहीं होने के कारण वह डिप्रेशन में रहने लगा था। बताते हैं कि इस दौरान वह शराब का काफी मात्रा में सेवन करने लगा था।
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वहीं शुक्रवार रात करीब 11 बजे घर में विवाद हुआ। इसी वजह से उसने गुस्से में आकर आधी रात घर से निकलकर गांव की बाहरी सीमा पर स्थित गुनियाजुड्ड़ी के जंगल में एक पेड़ में फांसी का फंदा लगाकर जीवन लीला समाप्त कर ली। शनिवार सुबह खेतों में पहुंचे ग्रामीण पेड़ पर लटके शव को देख सन्न रहे गए। मौके पर शव की पहचान के बाद परिजनों को सूचित किया। आनन-फानन परिजन वहां पहुंचे। इसके बाद जंगल से शव को गांव में लाया गया। परिजनों द्वारा पुलिस को सूचना दिए बिना शव का अंतिम संस्कार कर दिया। बताया गया कि मृतक शराब का अधिक सेवन करता था।
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थाना प्रभारी ज्ञानेश्वर बौद्ध ने बताया कि मृतक बेटा नहीं होने के कारण मानसिक रूप से बीमार रहने लगा था और शराब पीने लगा था। हालांकि मौत के संबंध में पुलिस को कोई सूचना नहीं दी है। पुलिस परिजनों से बातचीत के बाद मौत के कारणों की जांच में जुटी है।