शामली के थानाभवन में 15 साल पहले पुलिस पर जानलेवा हमले के मामले में अदालत ने साक्ष्य के अभाव में नीटू कैल, अमित चौधरी समेत तीन आरोपियों को दोषमुक्त करार दिया। 15 साल बाद अदालत ने इस मामले में आज फैसला सुनाया है।
शामली के थानाभवन में 15 साल पहले पुलिस पर जानलेवा हमले के मामले में नीटू कैल समेत तीन आरोपियों को साक्ष्य के अभाव में दोषमुक्त करार दिया गया। सिपाही की हत्या से जुड़े इस मामले में नीटू कैल सजायाफ्ता है। अपर जिला एवं सत्र न्यायालय संख्या-आठ की पीठासीन अधिकारी नेहा गर्ग ने फैसला सुनाया।
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थानाभवन में 12 अक्तूबर 2011 को सिपाही की हत्या कर रायफल लूट ली गई थी। वारदात में तीन साल पहले नीटू कैल को आजीवन कारावास की सजा सुनाई गई थी। आरोपियों की गिरफ्तारी के दौरान मुठभेड़ में पुलिस पर जानलेवा हमले का मुकदमा भी थानाभवन में दर्ज हुआ था।
इस पत्रावली में आरोपी नीटू कैल, किरठल निवासी अमित चौधरी और चौंदाहेड़ी निवासी मनोज को आरोपी बनाया गया था। जानलेवा हमले के प्रकरण की सुनवाई अपर जिला एवं सत्र न्यायालय संख्या-आठ में हुई। शुक्रवार को नीटू कैल को अदालत में जेल से पेश किया गया। जमानत पर चल रहे आरोपी अमित चौधरी और मनोज भी पेश हुए। साक्ष्य के अभाव में तीनों आरोपियों को दोषमुक्त करार दिया गया।
क्या था मामला
थानाभवन की मस्तगढ़ पुलिया पर 12 अक्तूबर 2011 को बदमाशों ने सिपाही कृष्णपाल और अमित कुमार पर हमला कर रायफल लूट ली थी। गंभीर घायल मेरठ निवासी कृष्णपाल की मौत हो गई थी। 16 आरोपियों के खिलाफ आरोपपत्र दाखिल किया गया था। इनमें नीटू कैल को ही दोषी पाया गया था, 11 आरोपी दोषमुक्त करार दिए गए। चार आरोपियों की ट्रायल के दौरान मौत हो गई थी।
जेल में बिताए 862 दिन, एलएलबी की...दोनों बार दोषमुक्त
बागपत के किरठल गांव निवासी अमित चौधरी ने बताया कि घटना के दिन वह कैल शिकारपुर में अपनी बहन के घर आया हुआ था। पुलिस ने बेवजह उसका नाम दर्ज किया। वर्ष 2023 में उसे हत्या के मुकदमे में दोषमुक्त करार दिया गया था। चार नवंबर 2011 को पुलिस ने फर्जी मुठभेड़ दिखाकर उन्हें पकड़ा था।
इस मुकदमे में भी अदालत ने शुक्रवार को दोषमुक्त करार दिया। जब वह जेल गया, तब बड़ौत में बीए द्वितीय वर्ष का छात्र था। जेल में पढ़ाई जारी रखी। बीए, एलएलबी, एलएलएम और नेट की परीक्षा पास की। अब वह मेरठ और बागपत में वकालत भी कर रहा है। अदालत ने दोषमुक्त करार दिया।