राष्ट्रीय स्तर पर भी रहे हैं चर्चा में
रवि कुमार दिवाकर इससे पहले भी अपने कई महत्वपूर्ण न्यायिक आदेशों के कारण राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा में रह चुके हैं। वाराणसी स्थित ज्ञानवापी परिसर में श्रृंगार गौरी के दैनिक दर्शन-पूजन और देवी-देवताओं के विग्रहों के संरक्षण संबंधी वाद में वर्ष 2022 में उन्होंने अधिवक्ता आयुक्त नियुक्त कर सर्वेक्षण कराने के आदेश दिए थे, जिन पर बाद में सर्वोच्च न्यायालय ने भी मुहर लगाई।
इसके अलावा बरेली में उन्होंने दो माह के भीतर सुनवाई पूरी करते हुए आम आदमी पार्टी के प्रत्याशी पर हमले के मामले में दोषी ललित सक्सेना को आजीवन कारावास की सजा सुनाई थी। चित्रकूट के ठोकिया गिरोह से जुड़े चार आरोपियों को भी उन्होंने गिरोहबंदी निरोधक कानून के तहत सजा सुनाई थी।
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इन चर्चित मामलों में सुनाया फैसला
अधिवक्ता समीर सैफी हत्याकांड (6 अप्रैल 2026): वर्ष 2019 में 40 लाख रुपये के लेन-देन के विवाद में हुई हत्या के मामले में सिंगोल अल्वी, सोनू उर्फ रिजवान और शालू उर्फ अरबाज को मृत्युदंड, जबकि दिनेश को सात वर्ष के कारावास की सजा सुनाई गई।
शेखर हत्याकांड (28 अप्रैल 2026): वर्ष 2019 में लेन-देन के विवाद में हुई हत्या के मामले में मुकेश, प्रदीप, संदीप और सोनू को मृत्युदंड दिया गया।
राजेश देवी-हिमांशु हत्याकांड (30 मई 2026): वर्ष 2011 में मां-बेटे की हत्या के मामले में दोषी रईस को मृत्युदंड सुनाया गया।
राजेंद्र सैनी हत्याकांड (20 जून 2026): हत्या कर शव जलाने के मामले में रामकरण उर्फ सावन गिरी और गीलू को मृत्युदंड दिया गया।
होमगार्ड रतिराम हत्याकांड (2 जुलाई 2026): वर्ष 2020 में गश्त के दौरान होमगार्ड की हत्या के मामले में दोषी दीपक को मृत्युदंड सुनाया गया।
राजबीर सिंह हत्याकांड (6 जुलाई 2026): प्रधान पद की रंजिश में हुई हत्या के मामले में पूर्व प्रधान प्रमोद कुमार और सहदेव उर्फ पप्पू को मृत्युदंड दिया गया।
राज सिंह हत्याकांड (17 जुलाई 2026): शामली के कुड़ाना गांव के पास किसान राज सिंह की लूट के बाद हत्या के मामले में अजीत, सूरज उर्फ काला, अनिल और सुनील को मृत्युदंड की सजा सुनाई गई।