मुजफ्फरनगर के जानसठ में तालड़ा मोड़ पर हुए दर्दनाक हादसे में मजदूर विकेश 11 घंटे जिंदगी और मौत के बीच फंसा रहा। लेकिन हौसला नहीं हारा। एनडीआरएफ की टीम देर रात तक तलाश करती रही। जब विकेश मिला तो उसका पैर मलबे में बुरी तरह दबा था और पेट में सरिया घुसा था।
इस दौरान रेस्क्यू टीम ने किसी तरह उसे बचाया और प्राथमिक उपचार देकर उसे मेरठ अस्पताल भेजा। 11 घंटे मौत से जंग के बाद बाहर निकाले गए विकेश ने विजय का अंगूठा दिखाया तो खुशियां छा गईं।
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मुजफ्फरनगर हादसा
- फोटो : अमर उजाला
हादसा होने के बाद एसडीआरएफ और एनडीआरएफ की बचाव टीमों ने रातभर रेस्क्यू अभियान चलाया। मजदूर विकेश भी मलबे में दबे होने के बावजूद मौत से जंग लड़ रहा था। वह 11 घंटे तक जिंदगी और मौत से लड़ता रहा। उसने बचाव के दौरान एनडीआरएफ टीम को हाथ से इशारे भी किए और बात भी की।
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बताया गया कि कड़ी मशक्कत के बाद एनडीआरएफ टीम ने सोमवार की सुबह चार बजे जिला रामपुर के गांव सराय माजरा निवासी मजदूर विकेश पुत्र कृपाल को घायल अवस्था में बाहर निकाल लिया। उसे बचाने के लिए लिंटर काटना पड़ा। टीम ने उसे इंजेक्शन लगाया। ग्लूकोज की बोतल चढ़ाई गई। मेरठ अस्पताल में घायल विकेश का उपचार चल रहा है। उसकी हालत में सुधार है।
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रेस्क्यू अभियान के दौरान रातभर मौके पर एडीएम प्रशासन नरेंद्र बहादुर, एडीएम वित्त एवं राजस्व गजेंद्र सिंह, एसडीएम सुबोध कुमार, एएसपी विनायक भोसले, सीओ राम आशीष यादव सहित कई थानों का पुलिस बल मौके पर मौजूद रहा।
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विकेश ने विजय के अंगूठे से कहा थैंक्स
मलबे के नीचे दबे विकेश ने हिम्मत नहीं हारी थी। एनडीआरएफ टीम के सदस्य भी उसको सकुशल बाहर निकालने का भरोसा दिलाते रहे। मलबे के नीचे से निकलते ही घायल विकेश ने एक हाथ के अंगूठे से टीम को थैंक्स का इशारा किया।
विकेश और विक्की दोनों भाई मजदूरी करने आए थे
जिला रामपुर के गांव सराय माजरा निवासी विकेश व विक्की पुत्रगण कृपाल दोनों भाई मजदूरी करने के लिए आए थे। लिंटर गिरने के दौरान एक भाई विक्की बाल बाल बच गया था। जबकि उसका भाई विकेश मलबे में दबा रह गया।