बुधवार को दिव्यांग आरोपी पर दोष सिद्ध हुआ। अदालत ने लिखा कि दंड का निर्धारण करते समय अपराध की प्रकृति, पृष्ठभूमि और समाज पर पड़ने वाले प्रभाव के बीच संतुलन बनाना आवश्यक है।
इसके बाद दोषी को बीएनएस 2023 की धारा 65(2) और पॉक्सो अधिनियम 2012 की धारा 6 में दोषी को शेष प्राकृत जीवनकाल के लिए सश्रम आजीवन कारावास की सजा और 50 हजार रुपये अर्थदंड से दंडित किया गया।
धारा 137(2) के अंतर्गत दोषी को सात वर्ष के सश्रम कारावास और 10 हजार रुपये अर्थदंड की सजा सुनाई गई। दो सजाएं एक साथ चलेंगी। जुर्माने की संपूर्ण धनराशि 60 हजार रुपये पीड़िता को बतौर प्रतिकर दिए जाएंगे।