मुजफ्फरनगर में अदालत ने किशोरी से दुष्कर्म के मामले में दोषी को 20 साल की सजा और 35,500 रुपये जुर्माने की सजा सुनाई है। साक्ष्यों के अभाव में एक आरोपी को बरी कर दिया। विशेष अपर सत्र न्यायालय (पॉक्सो एक्ट) के पीठासीन अधिकारी बाबूराम ने फैसला सुनाया।
विशेष लोक अभियोजक दिनेश शर्मा और मनमोहन वर्मा ने बताया कि मामला अगस्त, वर्ष 2018 का है। थाना रतनपुरी निवासी क्षेत्र के गांव में किशोरी अपने चाचा के घर पर सो रही थी। इसी दौरान आरोपी शाहबाज और शावेज पहुंचे और किशोरी को छत पर ले गए और उसके साथ दुष्कर्म किया।
पुलिस ने विवेचना के बाद दोनों के खिलाफ न्यायालय में आरोप पत्र दाखिल किया। सत्र परीक्षण के दौरान अभियोजन पक्ष ने गवाह प्रस्तुत किए। अदालत ने दोनों पक्षों की दलील सुनने के बाद शाहबाज को दोषी करार दिया और संदेह का लाभ देते हुए शावेज को दोषमुक्त कर दिया।
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दोषी शाहबाज को 452 में तीन साल की सजा और तीन हजार रुपये जुर्माना, 376 में 20 साल की सजा और 30 हजार रुपये जुर्माना, 323 में छह माह की सजा और 500 रुपये जुर्माना एवं धारा 506 में दो साल की सजा एवं दो हजार रुपये के अर्थदंड की सजा सुनाई है। पीड़िता को क्षतिपूर्ति के रूप में जुर्माने की राशि में से 20 हजार रुपये देने के निर्देश दिए है।
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