गंभीर अपराध का हवाला देकर जमानत खारिज
नितिन की ओर से मुठभेड़ के मामले में जमानत अर्जी दाखिल की गई थी। सुनवाई के दौरान अदालत ने आरोपी के आपराधिक इतिहास और अपराध की गंभीरता का उल्लेख करते हुए जमानत देने से इनकार कर दिया। अपर सत्र न्यायाधीश (त्वरित न्यायालय) संख्या-3 के पीठासीन अधिकारी रवि कुमार दिवाकर ने जमानत अर्जी निरस्त कर दी।
अधूरी आख्या पर अदालत ने जताई नाराजगी
सुनवाई के दौरान अदालत के समक्ष थाना स्तर से जो आख्या प्रस्तुत की गई, उसे लेकर न्यायालय ने कड़ी नाराजगी व्यक्त की। अदालत ने पाया कि आख्या सातवें अनुच्छेद से शुरू होकर चौदहवें अनुच्छेद पर समाप्त हो रही थी, जबकि पहले छह अनुच्छेद पूरी तरह अनुपस्थित थे।
न्यायालय ने टिप्पणी की कि प्रथम दृष्टया ऐसा प्रतीत होता है कि विवेचक और थाना प्रभारी का यह कृत्य आरोपी को अनावश्यक लाभ पहुंचाने की दिशा में हो सकता है।