मई 2014 में आरोपी उसे फुलत स्थित मदरसा जामिया इमाम शाह वलीउल्लाह इस्लामिया ले गया। मौलाना कलीम सिद्दीकी ने कलमा पढ़वाकर उसका धर्म परिवर्तन करने के बाद नया नाम अब्दुल्ला रखा था।
पुलिस ने मौलाना कलीम सिद्दीकी, हाजी सलीम, दिलशाद, जाहिद मुल्ला, नौशाद, मोमीन और इसरार प्रधान के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया था। आरोपियों के खिलाफ 17 अप्रैल 2022 को आरोप पत्र दाखिल कर दिया गया था। गुरुवार को एसीजेएम द्वितीय कोर्ट में प्रकरण की सुनवाई हुई। आरोपी अदालत में हाजिर नहीं हुए। अदालत ने दोबारा समन जारी करने के आदेश दिए।
यह भी पढ़ें: Baghpat: राज्यमंत्री केपी मलिक के भाई की स्क्रैप फैक्ट्री में भीषण आग, जानें कितने लाख का हुआ नुकसान
देवबंद में सिखाई गई थी उर्दू
पीड़ित ने पुलिस को बताया था कि उसे जमात में ले जाकर नमाज व कलमा पढ़ना सिखाया गया था। वर्ष 2015 में उसे मदरसा देवबंद में उर्दू व अरबी भाषा सीखने के लिए भेजा गया था। 25 अक्तूबर 2021 को उसकी पिटाई की गई और गोमांस खाने का दबाव बनाया गया, जिसके बाद वह जान बचाकर भाग आया था।
मौलाना कलीम भी मुकदमे में आरोपी
फुलत के मौलाना कलीम को दूसरे प्रकरण में लखनऊ में उम्रकैद की सजा सुनाई गई थी। एटीएस ने मौलाना को 21 सितंबर 2021 को मेरठ में गिरफ्तार किया था।