पश्चिम यूपी में नए सिरे से अपनी जड़ें मजबूत करने की कोशिश में जुटे रालोद के पहले संसदीय बोर्ड की बैठक में मिशन 2027 का खाका खींचा गया। आंतरिक मामलों, चुनावी रणनीतियों और संगठन के विस्तार पर चर्चा हुई। पिछले दो साल में कई मौके पर भाकियू टिकैत और रालोद के बीच बयानों की तल्खी रही लेकिन बैठक में संगठन के महासचिव युद्धवीर सिंह विशेष आमंत्रित सदस्य के तौर पर शामिल हुए।
नवनियुक्त संसदीय बोर्ड की पहली बैठक दिल्ली के कॉन्स्टीट्यूशन क्लब में हुई। अध्यक्षता पूर्व सांसद और बोर्ड के अध्यक्ष केसी त्यागी ने की। केंद्रीय राज्यमंत्री और रालोद के राष्ट्रीय अध्यक्ष चौधरी जयंत सिंह शामिल हुए। सदस्यों ने पार्टी की विचारधारा को आगे बढ़ाने का संकल्प लिया। उन्होंने जमीनी स्तर पर संगठन को मजबूत करने पर जोर दिया। रालोद विधानमंडल दल के नेता राजपाल बालियान ने बताया कि आंतरिक मामलों पर चर्चा हुई। राष्ट्रीय अध्यक्ष ने एनडीए की नीतियों और जनहित के कार्यों को जनता के बीच ले जाने तथा गठबंधन को और अधिक मजबूत बनाने पर भी विचार-विमर्श किया।
व्यापक प्रभाव वाले लोग भी शामिल : जयंत सिंह
रालोद अध्यक्ष जयंत सिंह की ओर से जारी बयान में कहा गया कि बोर्ड में पार्टी से जुड़े लोगों के साथ-साथ समाज में व्यापक प्रभाव रखने वाले प्रतिष्ठित नागरिक भी शामिल किए गए हैं। इनमें किसान नेता युद्धवीर सिंह और मेजर जनरल विशंभर दयाल भी शामिल है।
भाकियू से तल्खी के बीच रालोद का दहला
साल 2022 का चुनाव रालोद और सपा ने गठबंधन में लड़ा। पश्चिम में रालोद को नई ताकत मिली। साल 2024 में रालोद के एनडीए में शामिल हो जाने के बाद कई मौकों पर भाकियू और रालोद के बीच तल्खी दी गई। अब रालोद के रणनीतिकारों ने नया दांव चला है। भाकियू के राष्ट्रीय महासचिव युद्धवीर सिंह को ही संसदीय बोर्ड में विशेष आमंत्रित सदस्य बना दिया है। असल में रालोद और भाकियू टिकैत दोनों के पास ही पश्चिम यूपी की बड़ी किसान ताकत है। ऐसे में इस फैसले को भी मिशन 2027 से ही जोड़कर देखा जा रहा है।
पहली बैठक में परिचय हुआ : युद्धवीर सिंह
भाकियू महासचिव युद्धवीर सिंह ने बताया कि पहली बैठक में सदस्यों का परिचय हुआ। कुछ बिंदुओं पर चर्चा की गई है। आने वाली बैठकों में और अधिक विस्तार से मुद्दों पर चर्चा होंगी।
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