मुजफ्फरनगर में पतंजलि योग धाम हरिद्वार के अध्यक्ष स्वामी दिव्यानंद सरस्वती ने कहा कि वैदिक संस्कृति में सत्य, सदाचार और चरित्र जीवन मूल्यों को आधार है। गृहस्थ आश्रम की मर्यादा और पवित्रता के लिए माता-पिता आदर्श आचरण प्रस्तुत करें।
सरकुलर रोड स्थित एक बैंक्वेट हॉल में आयोजित मातृ-पितृ सम्मेलन में मुख्य अतिथि स्वामी दिव्यानंद सरस्वती ने कहा कि भारतीय संस्कृति नैतिक मूल्यों और त्याग पर आधारित है। ऋषियों ने पांच महायज्ञों का विधान दिया है, जिसमें ब्रह्मयज्ञ, देव यज्ञ, मातृ-पितृ यज्ञ, अतिथि यज्ञ और बलिवैश्व देव यज्ञ है।
परिवार में संस्कृति के वैभव के लिए ऋषियों की परंपराओं को अपनाएं। वेदों के अनुकूल आचरण से ही संस्कृति की रक्षा संभव है। वेदों में योग विद्या में पीएचसी स्वामी ने जीवन कल्याण के लिए यज्ञ और योग की महिमा पर विस्तार से चर्चा की। आचार्य गुरुदत्त आर्य ने कहा कि भावी पीढ़ी के चरित्र से ही राष्ट्र का गौरव बढ़ेगा।
अभिभावक बच्चों को बचपन से ही संस्कारित बनाएं। स्वामी भजनानंद ने कहा कि यज्ञ संस्कृति का मुख्य अंग है। स्वामी सत्यवेश ने राष्ट्रीय एकता और सद्भाव के लिए जातिवाद मिटाने का आह्वान किया। स्वामी योगानंद ने पाठ्यक्रम में वैदिक शिक्षा को जोड़ने की महत्ता बताई। संयोजक पूर्व एबीएसए सहदेव सिंह आर्य ने स्वामी दिव्यानंद सरस्वती और आचार्य गुरुदत्त आर्य को सम्मानित किया।
बीएसए सतेंद्र सिंह, सत्यमुनि, आरपी शर्मा, योगेश्वर दयाल आर्य, प्रधानाचार्य तेजपाल सिंह, सुरेंद्र पाल आर्य, स्वामी मेघानंद, संदीप आर्य, सुभाष आर्य ने भी विचार व्यक्त किए। संचालन अधिवक्ता सुघोष आर्य व सहदेव सिंह ने संयुक्त रुप से किया। यज्ञमान का दायित्व विशाल एवं कामिनी चौधरी ने निभाया।