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पांचली में मृत मिलीं 36 से अधिक चिड़ियां

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पुरकाजी के गांव पांचली खादर में मरी पड़ी चिड़िया। - फोटो : MUZAFFARNAGAR
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पुरकाजी/मीरापुर (मुजफ्फरनगर)। बर्ड फ्लू की आशंका से ग्रामीण क्षेत्र में फैला दहशत के माहौल में लगातार बढ़ता ही जा रहा है। शुक्रवार शाम जहां पुरकाजी के गांव पांचली में अचानक 36 से अधिक चिड़िया मृत मिलीं। वहीं मीरापुर के क्षेत्र के गांव नरसिंहपुर चुड़ियाला में दो कौवे भी मृत मिले।
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पुरकाजी खादर क्षेत्र के गांव पांचली में शुक्रवार शाम अचानक 36 से अधिक चिड़िया मौत का शिकार हो गईं। ग्रामीणों का कहना है कि शाम करीब छह बजे आसमान में उड़ रहीं ये चिड़िया, अचानक एक-एक कर नीचे जमीन पर आ गिरीं और मर गईं। तत्काल पशु चिकित्सालय को इसकी जानकारी दी गई, जिस पर डॉ मोहित चौहान टीम के साथ मौके पर पहुंचे और मृत चिड़ियाओं को सावधानी पूर्वक कब्जे में ले लिया। जिस स्थान पर चिड़िया मृत मिलीं हैं, वहां सैनिटाइजेशन करा दिया गया है। वहीं, गांव के ग्रामीणों को भी ऐहतियातन बरतने के निर्देश दिए गए हैं। डॉ मोहित चौहान का कहना है मृत चिड़ियाओं को जांच के लिए भेजा जाएगा, जिसकी रिपोर्ट आने के बाद ही इनकी मौत के कारणों का खुलासा हो पाएगा।
उधर, मीरापुर क्षेत्र के गांव नरसिंहपुर चुड़ियाला में शुक्रवार शाम दो कौवे मृत मिले। जब तक ग्रामीण वहां पहुंचते, मृत कौवों को आवारा कुत्तों ने खा लिया। ग्रामीणों का कहना है कि बर्ड फ्लू की आशंका के चलते पशुपालन विभाग को कौवे मरने की सूचना दी गई, लेकिन घंटों तक कोई कर्मचारी गांव में नहीं पहुंचा, जिसके चलते मृत कौवों को कुत्ते खा गए। वहीं, पशुपालन विभाग के मीरापुर प्रभारी डॉ समीर बिंदल ने बताया कि कौवे मरने की सूचना पर टीम को गांव में भेजा गया था, लेकिन वहां कोई मृत कौआ नहीं मिला।
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ऐपीसेंटर कुतुबपुर में कराया सैनिटाइजेशन
मुजफ्फरनगर। मीरापुर क्षेत्र के गांव कुतुबपुर में मृत कौवे में बर्ड फ्लू के लक्षण मिलने के बाद ऐपीसेंटर बनाया गया था। शुक्रवार को मुख्य पशु चिकित्साधिकारी डॉ एमपी सिंह ने गांव में टीम भेजकर सैनिटाइजेशन कराया। वहीं, गांव तिसंग में बर्ड फ्लू को लेकर जागरूकता शिविर का आयोजन किया गया। इसमें ग्रामीणों को बर्ड फ्लू के लक्षण और इसके फैलने के संबंध में जागरूक किया गया। डॉ एमपी सिंह ने बताया कि जनपद में विभिन्न स्थानों पर जंगली पक्षियों की मौत की सूचना मिलने पर तत्काल टीम को भेजकर उसका निस्तारण कराया जा रहा है। अब तक कहीं से भी पक्षियों की एक ही स्थान पर अत्यधिक मौत की सूचना नहीं है।
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