एशिया की सबसे बड़ी गुड़ मंडी पर संकट के बादल मंडरा रहे हैं। कोल्हुओं के सामने कई प्रकार का संकट खड़ा हो गया है। बिजली विभाग ने चार माह के लिए कनेक्शन की फीस 78 हजार रुपये कर दी है। लेबर और गुड़ की बिक्री की समस्या पहले से है। जिले में इस समय लगभग चार हजार कोल्हू संचालित हैं।
गुड़ उद्योग मुजफ्फरनगर के सामाजिक और आर्थिक ढांचे से जुड़ा है। कोल्हुओं के संचालन से जहां हजारों लोगों को रोजगार मिलता है, वहीं यह व्यापार की मुख्य धुरी भी है। मंडी में व्यापारियों से लेकर कोल्ड स्टोर तक के मालिकों का हित इससे जुड़ा है। इस बार कोल्हू संचालकों के सामने संकट खड़ा हो गया है। बिजली विभाग ने फरमान जारी कर दिया है कि प्रत्येक कोल्हू संचालक को 78 हजार रुपये देकर चार माह के लिए कनेक्शन कराना होगा। बिना कनेक्शन के कोल्हू नहीं चलने दिए जाएंगे। ऐसी स्थिति में बिजली विभाग के विजिलेंस अधिकारियों की मौज आ गई है।
विभाग ने कोल्हुओं से सीधे पैसा बांध लिया है, जो कोल्हू मुख्य मार्ग पर हैं उन्हें कह दिया है कि वह अपनी सरकारी रसीद कटा लें। कोल्हू संचालक परेशान हैं कि वह क्या करें। दूसरी ओर गन्ना 230 से 260 तक खरीदना पड़ रहा है। किसान अब कम रेट में गन्ना देने को तैयार नहीं हैं। एक तरफ तो गन्ना महंगा है, दूसरी तरफ मंडी में गुड़ के दाम अचानक घट गए हैं। गुड़ के दाम घट जाने से कोल्हू नुकसान में आ गए हैं। कोल्हू का संचालन करने वालों के सामने अब सबसे बड़ा संकट लेबर का है। लेबर नहीं मिल पा रही है। एक कोल्हू पर कम से कम पांच आदमी चाहिए।
नहीं बन पाए हैं आधुनिक कोल्हू
मुजफ्फरनगर। कोल्हू उद्योग पुराने परंपरागत तरीकों पर चल रहा है। आधुनिक मशीनें कोल्हू उद्योग में अभी तक नहीं आई हैं। आधुनिक कोल्हू आएंगे तो लेबर कम हो जाएगी। जिले में प्रतिदिन लगभग 80 हजार मन गुड़ का उत्पादन हो रहा है। मंडी में केवल पांच से लेकर सात हजार मन तक ही पहुंच पा रहा है। बाकी गुड़ माफिया सीधे बेच रहे हैं। उन्हें मंडी का ढाई प्रतिशत टैक्स नहीं देना पड़ रहा है।
माफिया की राजनीतिक हैसियत
मुजफ्फरनगर। गुड़ माफिया राजनीतिक सिफारिशों का लाभ उठाते हैं। अधिकतम माफियाओं ने अपने परिवार के लोगों अलग-अलग राजनीतिक दलों में शामिल करा रखा है। ये लोग राजनीतिक दलों को चंदा भी देते हैं। टैक्स चोरी में नेताओं और अधिकारियों की मिलीभगत है।