जानसठ तहसील में रामलीला की भूमि को लेकर एसडीएम से बातचीत करते कमेटी के पदाधिकारी तथा मौके पर मौजू
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विधायक और रामलीला कमेटी के लोग आमने-सामने
जानसठ (मुजफ्फरनगर)। गांव कवाल में दशहरे पर रावण का पुतला दहन करने को लेकर रामलीला की भूमि खाली कराने को लेकर विवाद खड़ा हो गया है। रामलीला कमेटी के लोग और विधायक आमने सामने आ गए। एसडीएम का कहना है कि इस मामले का दशहरे के बाद निस्तारण कराया जाएगा। उधर, रामलीला कमेटी के अध्यक्ष ने चेतावनी दी कि रामलीला की भूमि खाली नहीं हुई, तो गांव में रावण के पुतले का दहन नहीं किया जाएगा।
कवाल गांव में रामलीला कमेटी की गांव में करीब दस बीघा खेती की भूमि है। रामलीला कमेटी के नरेश कुमार फिलहाल अध्यक्ष हैं। रामलीला कमेटी ने इस दस बीघा भूमि को महेंद्र को तीन साल के लिए ठेके पर दे रखी है। कमेटी अध्यक्ष के मुताबिक प्रत्येक वर्ष ठेके पर लेने वाला व्यक्ति दशहरे के दिन रावण का पुतला दहन करने को लेकर भूमि खाली करता है। इस बार उसने भूमि पर फूलों की खेती कर रखी है। महेंद्र ने इस रामलीला की इस भूमि को खाली करने से इंकार कर दिया। रामलीला कमेटी के पदाधिकारी और विधायक आमने सामने आ गए। विवाद खड़ा होने पर रामलीला कमेटी के लोग शनिवार को तहसील में एसडीएम अमृत पाल कौर के पास पहुंचे। विधायक ने एसडीएम को बताया कि वे किसी भी सूरत में ठेकेेदार से रामलीला की भूमि खाली नहीं होने देंगे।
विधायक विक्रम सैनी का कहना है कि महेंद्र ने रामलीला की भूमि ठेके पर ले रखी है। उसने भूमि पर फूलों की खेती कर ली। इसके बावजूद भी महेंद्र ने रामलीला की उस भूमि में से करीब एक बीघा भूमि खाली छोड़ रखी है। रामलीला कमेटी उस एक बीघा भूमि में रावण का पुतला दहन कर सकते हैं। उनको इसके लिए कोई आपत्ति नहीं है।
एसडीएम अमृत पाल कौर का कहना है कि रामलीला कमेटी ने रामलीला मंचन, श्रीराम बरात के अलावा रावण का पुतला दहन करने की अनुमति ले रखी है। यह मामला गांव का आपसी मामला है। ग्रामीण ही इस मामले को आपस में मिलजुल कर निस्तारण करा सकते हैं। फिलहाल रामलीला कमेटी से भूमि के कागजात ले लिए गए हैं। दहशरा के बाद इस मामले का पटाक्षेप करा दिया जाएगा।