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मलिक आए दौरे पर, भाजपा नेताओं ने बनाए रखी दूरी

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मुजफ्फरनगर। अपने बयानों के कारण सुर्खियों में रहने वाले मेघालय के राज्यपाल सत्यपाल मलिक का बघरा में किसानों ने सम्मान किया। दौरे से भाजपा नेताओं ने दूरी बनाए रखी। मंच, माइक और सभा में अधिकतर सपा और रालोद नेता ही नजर आए। किसान आंदोलन के दौरान राज्यपाल ने लगातार तीखे सवालों से सरकार को घेरने का काम किया था।
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बागपत के हिसावदा गांव में जन्में राज्यपाल सत्यपाल मलिक मलिक पश्चिमी उत्तर प्रदेश की किसान राजनीति में करीब 52 साल सक्रिय रहे हैं। भारतीय क्रांति दल, लोकदल, जनमोर्चा, जनता दल, कांग्रेस के बाद वह 2004 में भाजपा में शामिल हुए थे। 2005-06 में यूपी भाजपा के उपाध्यक्ष बनाए गए। 2009 में भाजपा किसान मोर्चा के अखिल भारतीय प्रभारी, 2014 में भाजपा के उपाध्यक्ष रहे और चुनावी घोषणापत्र की उपसमिति में कृषि विषयक मुद्दों के अध्यक्ष रहे थे।
उन्हें चार अक्तूबर 2017 को बिहार का राज्यपाल बनाया गया और वर्तमान में वह मेघालय में इसी पद पर हैं। संवैधानिक पद पर होने के कारण वह राजनीतिक मंच साझा नहीं करते, लेकिन किसान आंदोलन के दौरान वह भाजपा सरकार पर अपने बयानों से हमलावर हुए और लगातार किसानों के पक्ष में बयान देते रहे।
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पिछले दिनों जम्मू-कश्मीर के मामले में रिश्वत प्रकरण को उठाया तो सरकार को सीबीआई जांच बैठानी पड़ी। बयान सुर्खियां बनने लगे तो भाजपा नेता और सरकार असहज होने लगी। इसका असर उनके दौरे पर भी नजर आया। घासीपुरा से लेकर बघरा तक भाजपा नेता उनसे मिलने नहीं पहुंचे।
सपा-रालोद नेताओं से घिरे रहे राज्यपाल मलिक
पूर्व सांसद हरेंद्र मलिक, सपा नेता एवं पूर्व सांसद कादिर राना, पुरकाजी से रालोद विधायक अनिल कुमार, मीरापुर से रालोद विधायक चंदन चौहान, चरथावल विधायक पंकज मलिक, सपा जिलाध्यक्ष प्रमोद त्यागी, रालोद के निवर्तमान जिलाध्यक्ष प्रभात तोमर ने उनका अभिनंदन किया।
इस तरह परवान चढ़ी थी उनकी सियासी पारी
हिसावदा गांव निवासी सत्यपाल मलिक ने मेरठ कॉलेज में पढ़ाई के दौरान 1965 में छात्र राजनीति शुरू की। 1966-67 में मलिक मेरठ कॉलेज के पहले छात्रसंघ अध्यक्ष चुने गए। पूर्व प्रधानमंत्री स्वर्गीय चौधरी चरण सिंह ने भारतीय क्रांति दल का गठन किया। 1974 के विस चुनाव में बीकेडी के टिकट पर बागपत सीट से चुनाव लड़ा और विधानसभा पहुंचे थे। 1980 में लोकदल के प्रतिनिधि के रूप में उन्हें राज्यसभा भेजा गया था। वह उत्तर प्रदेश कांग्रेस कमेटी के महामंत्री भी रहे चुक हैं। 1988 में जनता दल में शामिल हुए और 1991 तक जनता दल के प्रवक्ता और सचिव रहे। 1989 में जनता दल के टिकट पर ही वह अलीगढ़ से सांसद चुने गए थे।
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