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समाज को नेक राह दिखलाना है मदरसों का मकसद

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चरथावल काशिफुल उलूम मदरसे में वार्षिकोत्सव में हिफ्ज कुरआन किए बच्चों की दस्तारबंदी करते अतिथि - फोटो : MUZAFFARNAGAR
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चरथावल। काशिफुल उलूम मदरसे के वार्षिकोत्सव पर हिफ्ज कुरान करने वाले बच्चों की दस्तारबंदी की गई। मौलाना हबीबुल्ला मदनी ने कहा कि मदरसे इंसान को जिंदगी जीने का तरीका बताते हैं। हर जाति और मजहब के लोगों के साथ भलाई से पेश आना ही इंसानियत है।
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कस्बे की जामा मस्जिद परिसर में चल रहे मदरसे काशिफुल उलूम में सालाना इजलास में मुख्य अतिथि मौलाना हबीबुल्ला मदनी ने कहा कि मदरसों में मजलूम की मदद और मिल जुलकर रहने की तालीम दी जाती है। मदरसे के मोहतमिम मौलाना कासिम ने कहा कि मदरसों का मकसद लोगों को राह दिखलाना है। मां-बाप के हक और उनके प्रति फर्ज, पड़ोसी के साथ बेहतर ताल्लुकात और मुल्क के प्रति कर्तव्य की भावना को सिखाना है। जलसे में लोगों को मुल्क व अवाम की तरक्की और बेहतरी की दुआ कराई गई।
प्रबंधक मौलवी कासिम ने बताया कि मदरसे में कई जिलों के 400 से अधिक बच्चे दीनी शिक्षा के साथ दुनियावर तालीम ग्रहण कर रहे हैं। मौलाना जुबेर रहमानी, मौलाना नजर, इरफान, और यामीन ने विचार रखे। हिफ्ज कुरान मुकम्मल करने वाले सुहैल, मुदस्सिर, मोईन रासना मेरठ, अहतराम अंबेहटा, अहबाब दधेडू, अब्दुल वद्दू बिहार, उबेदुल्ला कुल्हेड़ी, उस्मान और फरीद की दस्तारबंदी की गई। नजर मोहम्मद की अध्यक्षता और शाह आलम कासमी के संचालन में मुफ्ती शफीक, अहसान, मोहसीन, ताहिर कासमी, हाफिज फुरकान असअदी, कारी नौशाद, कारी खालिद, पूर्व चेयरमैन के पति इस्लामुद्दीन और हाफिज रफीक आदि मौजूद रहे।
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