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पाले की चपेट में आलू, गेहूं की फसल, किसान चिंतित

Tue, 15 Jan 2019 12:26 AM IST
Deepak Kausik अमर उजाला ब्यूरो/ मुजफ्फरनगर
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खेतों में जमा पाला। - फोटो : अमर उजाला
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कई दिन से पड़ रहा पाला फसलों को नुकसान पहुंचा सकता है। पाले के प्रकोप से गेहूं और आलू की फसल झुलसा रोग की चपेट में आ सकती है। इसे लेकर किसान चिंतित हैं। लगातार ठंड, कोहरे और पाले के असर से फसलों पर प्रतिकूल असर पड़ रहा है। इन दिनों गेहूं और आलू के अलावा सरसों की फसल भी खेतों में खड़ी है। यह फसलें पाले से प्रभावित होती हैं।
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ज्यादा ठंड और पाले के कारण झुलसा रोग की चपेट में आ जाती हैं। मुलायम पत्ती वाली फसलों के लिए पाला खतरनाक होता है। जिले में 50 हजार हेक्टेयर से ज्यादा गेहूं तथा 2200 हेक्टेयर आलू का रकबा है। सिखेड़ा के किसान बृजपाल सिंह, राजेंद्र पाल एवं मुनीष का कहना है कि पाले के असर से आलू और गेहूं की पत्तियां पीली पड़ने लगी हैं। वह गेहूं की सिंचाई कर रहे हैं।  

बचाव के लिए करते रहें सिंचाई
जिला कृषि रक्षा अधिकारी पवन विश्वकर्मा का कहना है कि कोहरा और पाला पड़ रहा है। पाले के कारण गेहूं, आलू और तिलहन की फसलों की नुकसान हो सकता है। फसलों को बचाने के लिए सिंचाई करने के साथ ही दवा का छिड़काव करें। आलू की फसल को झुलसा से बचाने के लिए मैंकोजेब 75 प्रतिशत या कापर ऑक्सी क्लोराइड 50 प्रतिशत का छिड़काव करें। गेहूं में जिनेब 75 प्रतिशत का छिड़काव करना चाहिए।
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करें यह उपाय
- फसल में हल्का पानी दें, खेत में नमी बनाएं रखें।
- ज्यादा पानी न दें नहीं तो नुकसान होगा।
- फसल में कोई बीमारी आ रही है तो विशेषज्ञ से सलाह लें।
- किसान सुबह के समय पूरे खेत पर घूमकर फसल का जायजा जरूर लें।

शीतलहर से ठिठुरे लोग  
मुजफ्फरनगर। सोमवार को तापमान में इजाफा हुआ, लेकिन शीतलहर के कारण मौसम में ठिठुरन बरकरार रही। सवेरे खेतों में पाले का असर देखने को मिला। जगह-जगह पाले की चादर सी बिछी थी। दिन चढ़ते ही तेज और ठंडी हवा शुरू हो गई। धूप खिलने के बावजूद शीतलहर से जबरदस्त ठंड रही। जिले का न्यूनतम तापमान सात डिग्री और अधिकतम 20 डिग्री रिकार्ड किया गया। न्यूनतम तापमान में बढ़ोतरी के बावजूद ठंड से निजात नहीं मिली। शाम होते ही गलन शुरू हो गई।

खेतों में जमीं पाले की चादर
भोपा। भोपा- मोरना क्षेत्र में कोहरे के बाद अब पाले का प्रकोप शुरू हो गया है। सोमवार सुबह खेतों में पाले की चादर जमी रहीं। इसका फसलों पर प्रतिकूल असर पड़ता है। पिछले एक माह से भी अधिक समय से लोग कड़ाके की सर्दी का प्रकोप झेल रहे हैं। कई दिनों से घना कोहरा छा रहा था, लेकिन अब पाला पड़ना शुरू हो गया है। सोमवार को भोपा, मोरना, भोकरहेड़ी व शुकतीर्थ क्षेत्र में पाला पड़ा, जिससे सर्दी में और इजाफा हो गया। किसानों का मानना है कि पाला पड़ने से सब्जियों की फसल पर तो प्रभाव पड़ेगा ही साथ ही फूलों की खेती भी प्रभावित होगी। गेहूं और आलू की फसल पाले के प्रति काफी संवेदनशील होती है। 
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