गायों के संरक्षण के लिए जिले में गो-संरक्षण केंद्र का निर्माण किया जाएगा। इस पर करीब एक करोड़ रुपये का खर्च आएगा। फिलहाल 50 लाख रुपये जारी कर दिए गए हैं। जिला पंचायत और नगर निकायों को खंडहर हो चुके कांजी हाउस को सही कराने के निर्देश भी दिए गए हैं। आवारा घूमने वाले गोवंश पुलिस-प्रशासन के साथ ही आम जनमानस के लिए सिरदर्द बन गए हैं। इनके संरक्षण के लिए शासन ने कदम उठाने शुरू किए हैं। इसके तहत आवारा गोवंश को रखने के लिए जनपद में गो-संरक्षण केंद्र की स्थापना की जानी है।
इसके लिए प्रशासन द्वारा सदर तहसील के गांव बधाई कलां में पशुपालन विभाग की 1.22 हेक्टेयर भूमि को चिह्नित किया गया है। निर्माण कार्य के लिए 50 लाख रुपये भी शासन से अवमुक्त कर दिए गए हैं, जिसके बाद अब शीघ्र ही इस पर काम शुरू हो जाएगा। प्रस्तावित गो-संरक्षण केंद्र में 400 से 500 तक गोवंश रखे जा सकते हैं। जिला पंचायत के गांव मखियाली और जानसठ में स्थित कांजी हाउस का भी सुधार कराया जा रहा है। इनमें भी आवारा पशुओं को रखने की व्यवस्था की जाएगी। नगर पालिका और नगर पंचायतों के कांजी हाउस भी सुधारने के निर्देश दिए गए हैं। इनमें निराश्रित गोवंश को रखा जाएगा।
अब तक पकड़े गए 184 गोवंश
शासन के निर्देश के बाद आवारा घूमने वाले गोवंश को पकड़ने का अभियान चलाया गया। अब तक 184 गोवंश पकड़े गए हैं। इनमें से 10 को नई मंडी गोशाला, 57 को बुढ़ाना में बनाई गई अस्थायी गोशाला, 70 को रामपुर गोशाला भेजा गया है। इसके अलावा शाहपुर नगर पंचायत में 15 और खतौली नगर पालिका में 18 गोवंश को रखा गया है।
मुख्य पशु चिकित्साधिकारी डॉ हुकम सिंह ने बताया कि गोवंश की चिकित्सा की व्यवस्था विभाग द्वारा की जा रही है। उनके पालन-पोषण की व्यवस्था वहीं होगी जहां पर उन्हें रखा गया है।