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UP: हाथी की चिंघाड़ से तय होंगे लोकसभा चुनाव के समीकरण, गठबंधन को लगा तगड़ा झटका, पढ़ें क्या बोले दिग्गज नेता

Wed, 17 Jan 2024 12:06 PM IST
कपिल kapil अमर उजाला ब्यूरो, मुजफ्फरनगर

सार

Lok Sabha Election 2024 : बसपा सुप्रीमो मायावती के एलान से इंडिया गठबंधन की मुश्किलें बढ़ जाएंगी। अब यहां पर लोकसभा चुनाव में त्रिकोणीय मुकाबले के आसार बन गए हैं।
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अखिलेश यादव और जयंत चौधरी - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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बसपा सुप्रीमो व पूर्व मुख्यमंत्री मायावती ने इंडिया गठबंधन से दूर रहने के संकेत देकर सियासी गलियों में नई बहस छेड़ दी है। भाजपा से मुकाबले की तैयारी कर रहे गठबंधन की मुश्किलें बढ़ सकती हैं। इतना तय है कि बसपा की चुनावी रणनीति से ही लोकसभा के समीकरण तय होंगे।

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पिछले दो दशक के सियासी परिदृश्य में बसपा अपनी ताकत दिखाती रही है। साल 2009 में बसपा के टिकट पर कादिर राना जीतकर लोकसभा पहुंच गए थे। इसके बाद मुजफ्फरनगर दंगे ने सियासत के समीकरण बदल दिए। साल 2014 और 2019 में भाजपा से डॉ. संजीव बालियान जीते और केंद्र में मंत्री बनाए गए।

वहीं, बसपा ने पिछला चुनाव गठबंधन के साथ लड़ा था, लेकिन इस बार अलग रहने के संकेत दे दिए हैं। ऐसे में गठबंधन की मुश्किलें बढ़ सकती हैं। इसकी वजह यह भी है कि बसपा ने जिन लोकसभा चुनाव में प्रत्याशी उतारे, उसकी स्थिति मजबूत नजर आई है। मुजफ्फरनगर लोकसभा में त्रिकोणीय मुकाबले के आसार बन गए हैं।

बसपा ने इन प्रत्याशियों को उतारा
चुनाव                प्रत्याशी            

1996             ताराचंद शास्त्री
1998             ताराचंद शास्त्री
1999             राजपाल सैनी
2004             सूरत सिंह वर्मा
2009             कादिर राना
2014             कादिर राना
2019             गठबंधन

बसपा से चमके और साथ छोड़ गए
सियासी समीकरण की लिहाज से सबसे मजबूत बसपा से चुनाव लड़ने वाले नेता धीरे-धीरे पार्टी को छोड़ गए। पूर्व सांसद कादिर राना, पूर्व सांसद राजपाल सैनी, रालोद के वर्तमान विधायक अनिल कुमार, पूर्व मंत्री योगराज सिंह, पूर्व विधायक नूर सलीम राना, पूर्व विधायक नवाजिश आलम, पूर्व विधायक मौलाना जमील, पूर्व मंत्री यशवंत सिंह, प्रदीप सैनी, सूरत सिंह वर्मा ने बसपा का दामन छोड़ दिया।

विधानसभा में सब पर भारी रही बसपा
पिछले दो दशक के विधानसभा चुनाव देखें तो बसपा अन्य राजनीतिक दलों पर भारी पड़ती नजर आई है। 2002 में मोरना से राजपाल सैनी और चरथावल से उमा किरण विधायक चुनी गई थी। हालांकि, बाद में उमा किरण सपा में शामिल हो गई। 2007 में खतौली से योगराज सिंह, जानसठ से डॉ. यशवंत सिंह, चरथावल से अनिल कुमार चुनाव जीते। 2009 के लोकसभा चुनाव में कादिर राना सांसद चुने गए थे। 2012 के चुनाव में मीरापुर से मौलाना जमील, चरथावल से नूरसलीम राना और पुरकाजी से अनिल कुमार चुनाव जीत थे। 2017 और 2022 में बसपा सारी सीटें हार गईं।

हम मजबूती से चुनाव लड़ेंगे : रवि
बसपा जिलाध्यक्ष सतीश रवि का कहना है कि बसपा मजबूती से चुनाव लड़ेगी। गठबंधन का निर्णय नेतृत्व का होगा। पूरी ताकत से प्रत्याशी को चुनाव लड़ाया जाएगा।

सपा सूबे में मुख्य विपक्षी दल : जिया
सपा जिलाध्यक्ष जिया चौधरी का कहना है कि सपा सूबे में मुख्य विपक्षी दल है। गठबंधन का लाभ बसपा को सबसे ज्यादा होगा। सभी दलों को साथ मिलकर ही चुनाव लड़ना चाहिए।

गठबंधन में ही लड़ना चाहिए चुनाव : मलिक
रालोद जिलाध्यक्ष संदीप मलिक का कहना है कि भाजपा को सत्ता से बेदखल करने के लिए विपक्षी दलों को साथ आना होगा। बसपा को भी गठबंधन में शामिल रहना चाहिए।

बसपा के फैसले से फर्क नहीं पड़ता : सैनी
भाजपा जिलाध्यक्ष डॉ. सुधीर सैनी का कहना है कि बसपा के फैसले से हमारी तैयारी पर फर्क नहीं पड़ता। भाजपा का लक्ष्य 51 प्रतिशत से अधिक वोट लेना है। जनता पूरी तरह भाजपा के साथ है।

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गठबंधन के आसार खत्म नहीं हुए : शर्मा
कांग्रेस जिलाध्यक्ष सुबोध शर्मा का कहना है कि अभी गठबंधन के आसार खत्म नहीं हुए। सभी दल अपनी तैयारी कर रहे हैं। चुनाव नजदीक आने के साथ-साथ समीकरणों में बदलाव होगा, गठबंधन की संभावना है।

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