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अस्पताल से श्मशान तक सिर्फ लाईन

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अस्पताल से श्मशान तक लाइन
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मुजफ्फरनगर। कोरोना महामारी के बीच जिले की व्यवस्था पूरी तरह रामभरोसे पहुंच गई है। निजी और सरकारी अस्पताल में उपचार के लिए लंबी लाइन है। जीवन रक्षक ऑक्सीजन और मेडिकल स्टोरों पर लोग कतारों में हैं। कोरोना की आरटीपीसीआर रिपोर्ट यहां आठ दिन बाद आ रही है। अस्पताल में बेड और वेंटिलेटर के लिए बड़ी लाइन है। यही नहीं मरने वाले इतनी संख्या में पहुंच रहे हैं कि श्मशान घाट और कब्रिस्तान में भी नंबर का इंतजार करना पड़ रहा है।
कोरोना महामारी के बीच ऐसा लग रहा है कि जनपद में प्रशासन पूरी तरह विफल हो गया है। आम आदमी खुद ही जान बचाने की जंग में लगा है। जिले में कोरोना की जांच रिपोर्ट ही यहां सबसे बड़ी समस्या बनी है। छह से आठ दिन के बाद जांच रिपोर्ट आ रही है। इस बीच संक्रमित व्यक्ति अपने पूरे परिवार को संक्रमित कर देता है। सरकार ने प्राइवेट जांच बंद कर दी है। मेडिकल कॉलेज को भी जांच करने से मना कर दिया गया है। ऐसे हालात में लोग बेबस हो गए हैं। उहापोह में कोरोना महामारी विकराल रूप धारण करती जा रही है। रिपोर्ट आने से पहले की कुछ लोग तो दम भी तोड़ रहे हैं। जो रिपोर्ट आ चुकी हैं उसमें ही जिले में 5353 पॉजिटिव हैं। इनमें 90 प्रतिशत लोग होम आइसोलेट हैं।
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अस्पतालों में जगह नहीं होने के कारण लोगों की लंबी लाइन लगी है। जिंदगी बचाने की जद्दोजहद में घर पर ही बीमारों को ऑक्सीजन दिया जा रहा है। इस ऑक्सीजन के लिए भी लाइन में लगा जा रहा है। चिकित्सकों से दवा लिखाने के लिए लंबी लाइनें हैं। सरकारी हो या निजी हर डॉक्टर के पास कई घंटे बाद नंबर आ रहा है। डॉक्टर को दिखाने की जंग जीत रहे हैं तो मेडिकल स्टोरों पर लंबी लाइनें हैं। जिंदगी बचाने की जद्दोजहद में जो लोग कोरोना से हार गए हैं, उन्हें श्मशान और कब्रिस्तान में भी नंबर का इंतजार करना पड़ रहा है। हालात यह है कि कुछ शवों को तो अगले दिन का इंतजार करना पड़ता है। कोरोना महामारी में व्यवस्था पूरी तरह धराशायी हो चुकी है और चारों तरफ सिर्फ लाइन ही दिखाई दे रही है।
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क्वारंटाइन सेंटर बनाना भूला प्रशासन
मुजफ्फरनगर। जिन परिवारों के पास रहने के लिए एक ही कमरा है, उनके परिवार में कोई पॉजिटिव आ रहा है, तो एक साथ रहने के अलावा उनके पास कोई चारा नहीं है। होम आइसोलेशन में रहने वाले ऐसे लोग अपने पूरे परिवार को पॉजिटिव कर रहे हैं। जिला प्रशासन इस बार क्वारंटाइन सेंटर बनाना भूल गया है। प्रशासन केवल औपचारिकता पूरी करने में लगा है। समस्या से निपटने के लिए ठोस योजना नहीं है।
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