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यूपी के इस जिले में दो साल का होते ही बच्चों को घेर लेती है अजीब बीमारी, स्वास्थ्य विभाग अनजान

Sun, 17 Nov 2019 03:00 PM IST
मेरठ ब्यूरो न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मुजफ्फरनगर
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गांव खुशीपुरा में हिलने की बीमारी से पीड़ित आफिया के साथ मां अमीर जहां - फोटो : अमर उजाला
मुजफ्फरनगर के मोरना गांव खुशीपुरा में कई बच्चे और युवक कुपोषण के शिकार हैं। ग्रामीणों ने गांव की बदहाल स्थिति को सुधारने के लिए पानी, मिट्टी और स्वास्थ्य की जांच करने की जिलाधिकारी से गुहार लगाई है। मोरना विकास खंड से 11 किलोमीटर दूर ग्राम पंचायत सीकरी के मजरे गांव खुशीपुरा में कई बच्चे और युवक कुपोषण का शिकार होकर शारीरिक रूप से कमजोर और लाचार नजर आते हैं।

परिजनों ने बताया कि गांव में जन्मे बच्चे करीब दो साल तक सही स्थिति में रहते हैं। इसके बाद बच्चों के शरीर और मानसिक संतुलन में बदलाव आने लगता है, जिसके चलते वे अच्छे से ना तो खानपान कर सकते हैं और ना ही ठीक प्रकार से बातों को समझ पाते हैं। बड़े होकर यह बच्चे बिना किसी सहारे के नहीं चल पाते। 
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कुपोषण - फोटो : अमर उजाला
पीड़ित बच्चों को रात में सुलाने के लिए परिजनों को रातभर जागना पड़ता है। किसी-किसी बच्चे को दिन में चार से पांच बार दौरे पड़ते हैं। पीड़ित परिजन रुपयों के अभाव में इन कुपोषित बच्चों की अच्छे चिकित्सक, हॉस्पिटल आदि में स्वास्थ्य की जांच कराने में सक्षम नहीं है। गांव खुशीपुरा में फारूख पुत्र तेवर मेव के छह बच्चे हैं, जिनमें मेहरबान, शब्बो और शकीला तीनों बच्चे ठीक हैं। वहीं, 12 वर्षीय महरूम, अपर (10), जुबेर आठ वर्षीय तीनों बच्चे मनोरोगी हैं।
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कुपोषण - फोटो : अमर उजाला
महरूम के पैरों की एड़ी करीब तीन से चार इंच पीछे की ओर अधिक बढ़ी हुई है। शाहरुख के पिता ने बताया कि वह पैदा होने के बाद चार साल तक ठीक रहा। लेकिन जैसे उसकी उम्र बढ़ती चली गई, वह शारीरिक और मानसिक रूप से कमजोर होता चला गया। सात वर्षीय आफिया पुत्री अमीर जहां को अजीबोगरीब बीमारी ने जकड़ रखा है।

आफिया जहां भी खड़ी होती है, वह हिलने लगती है। उसको रात में सुलाने के लिए माता-पिता को मेहनत करनी पड़ती है। वहीं 14 वर्षीय नूरजहां पुत्री अफसर अली के हाथ और पैर ठीक प्रकार से काम नहीं कर पाते। जुबान भी बेजान हो चली है। 12 वर्षीय हीरा पुत्र वसलुदीन का बीमारी की वजह से सिर छोटा होता चला जा रहा है और शरीर बढ़ रहा है।

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कुपोषण - फोटो : अमर उजाला
चार वर्षीय राबिया, 11 वर्षीय शब्बीर पुत्र इस्लाम और रजिया पुत्री इरशाद, नोशाद, आरुज पुत्र नोशाद, आदि के बच्चों को चलने में दिक्कतें बच्चे बिना सहारे के चल नहीं पाते।

गांव के अफसर अली, मोहसिन, सबदर अली, महमूद, सलीम, शमशुदीन, मुमत्याज, असगर, अफजाल, फरमान, शब्बू, नजीम, फजलू आदि ने जिलाधिकारी कुमारी सेल्वा जे से गांव में फैल रही इस भयानक बीमारी से निजात दिलाए जाने की गुहार लगाई है।
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कुपोषण - फोटो : अमर उजाला
जिंदगी जीने को संघर्ष कर रहे हैं बीमार बच्चे
गांव के युवा समाजसेवी सेवन ने बताया कि यह गांव गंगा खादर की सोनाली नदी की ढांग पर बसे हुए करीब 200 वर्ष हो चुके हैं। गांव में वर्षों पहले जाट, कश्यप, मल्लाह, मेव, कलंदर आदि बिरादरी के लोग परिवारों के साथ रहते थे।

गंगा खादर में खेती करने वाले इन ग्रामीणों ने खेतों पर मकान आदि बनाकर रहने लगे। आज गांव में मेव बिरादरी के करीब 75 परिवार ही शेष बचे हैं। गांव में 475 करीब की आबादी है। कई बच्चे और युवा बीमारियों के शिकार बनकर जिंदगी जीने के लिए संघर्ष कर रहे हैं।
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