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अपराजिता: जब नारी में शक्ति सारी, फिर नारी को क्यों कहलाए 'बेचारी', छात्राओं ने रखी बेबाक राय

Sun, 17 Nov 2019 12:18 AM IST
मेरठ ब्यूरो न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मेरठ
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Aprajita 100 million smiles - फोटो : अमर उजाला
सहारनपुर जनपद के रामपुर मनिहारान अमर उजाला के अपराजिता:100 मिलियन्स इस्माइल कार्यक्रम के तहत आयोजित महिला सुरक्षा पाठशाला पर छात्राओं ने अपनी बेबाक राय रखी। उन्होंने कहा कि आज महिला अपने आप को कमजोर न समझे, हिंदू शास्त्रों में भी नारी को शक्ति का रूप कहा गया है। चाहे वह काली है या दुर्गा, झांसी की रानी हो या सुचेता कृपलानी उन्हें पूरी दुनिया याद रखेगी।

देहली रोड स्थित डीएवी पब्लिक स्कूल में आयोजित कार्यक्रम में स्कूल के प्रधानाचार्य सत्येंद्र शुक्ला ने कहा कि छात्राएं अनजाने में हुई गलती पर भी पर्दा न डाले बल्कि उसे अपने परिजनों व गुरुजनों के साथ शेयर करे अन्यथा वही छोटी गलती बड़ा रूप लेकर सामने आएगी। उन्होंने छात्राओं का आह्वान किया कि वह किसी भी बुराई का डटकर मुकाबला करे क्योंकि महिला हमेशा अपराजिता होती है। 
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Aprajita 100 million smiles - फोटो : अमर उजाला
सहारनपुर यूथ संस्था के प्रेजीडेंट मोहसिन अहमद ने कार्यक्रम में छात्राओं को सुरक्षा के टिप्स देते हुए कहा कि महिलाओं ने हमेशा अपनी प्रतिभा के साथ-साथ अपने जोश-जुनून को साबित किया है। उन्होंने कहा कि महिलाएं भय का त्याग करें और अपने अंदर की अपराजिता शक्ति को जगाए। उन्होंने कार्यक्रम में छात्राओं को बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ की शपथ भी दिलाई।

 
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Aprajita 100 million smiles - फोटो : अमर उजाला
अध्यापिका मोनिका ने कहा कि नारी का सबसे पवित्र रूप मां में देखने को मिलता है और ईश्वर की जन्मदात्री नारी ही है। मां देवकी ने कृष्ण व मां पार्वती ने गणपति व कार्तिकेय को जन्म दिया हैं। अनीता डंगवाल ने कहा वर्तमान में लड़कियां हर क्षेत्र में बाजी मार रही है। यदि देखा जाए तो किसी भी बच्चे में संस्कार भरने का काम महिला द्वारा ही किया जाता है, क्योंकि बच्चों की प्रथम गुरु एक मां ही होती है। सविता शर्मा ने कहा कि छात्राएं खुद को किसी से भी कमतर न आंके।


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Aprajita 100 million smiles - फोटो : अमर उजाला
छात्रा खुशी छोक्कर ने कहा कि भारतीय संस्कृति में महिलाओं को देवी दुर्गा, लक्ष्मी आदि को यथोचित सम्मान दिया गया है। कहा कि अमर उजाला की अपराजिता मुहिम बहुत सराहनीय है इस मुहिम से महिलाओं के अंदर छिपी अतुलनीय शक्ति को जगाने का काम किया जा रहा है।

 
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Aprajita 100 million smiles - फोटो : अमर उजाला
छात्रा नताशा पंवार ने कुछ इस अंदाज में अपनी बात रखी छेड़ो मत जल जाओगे, दुर्गा और काली हूं मैं। परिवार का सम्मान, मां बाप का अभिमान हूं मैं। सृष्टि की उत्पत्ति का प्रारंभिक बीज हूं मैं, नए-नए रिश्तों को बनाने वाली रीत हूं मैं। रिश्तों को प्यार में बांधने वाली डोर हूं मैं, जिसको हर मुश्किल में संभाला उस पिता की बेटी हूं मैं। छात्रा कोमल पंवार ने कहा कि अब जरूरत है संकीर्ण सोच बदलने की, अब जरूरत है महिलाओं का सशक्त बनाने की।

छात्रा सिमरन ने कहा कि अपराजिता बनने के लिए अपने खुद पर भरोसा करना है। बरसो से महिलाओं पर थोपे गए रूढ़िवादिता रीति रिवाजों ने उसे कमजोर कर दिया है जब तक महिलाएं अपनी सुरक्षा को लेकर स्वयं खड़ी नहीं होगी, यह पुरुष प्रधान समाज उसका शोषण करता रहेगा। कहा कि जब नारी में शक्ति सारी, फिर नारी को क्यों कहे बेचारी।
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