Aprajita 100 million smiles
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छात्रा नताशा पंवार ने कुछ इस अंदाज में अपनी बात रखी छेड़ो मत जल जाओगे, दुर्गा और काली हूं मैं। परिवार का सम्मान, मां बाप का अभिमान हूं मैं। सृष्टि की उत्पत्ति का प्रारंभिक बीज हूं मैं, नए-नए रिश्तों को बनाने वाली रीत हूं मैं। रिश्तों को प्यार में बांधने वाली डोर हूं मैं, जिसको हर मुश्किल में संभाला उस पिता की बेटी हूं मैं। छात्रा कोमल पंवार ने कहा कि अब जरूरत है संकीर्ण सोच बदलने की, अब जरूरत है महिलाओं का सशक्त बनाने की।
छात्रा सिमरन ने कहा कि अपराजिता बनने के लिए अपने खुद पर भरोसा करना है। बरसो से महिलाओं पर थोपे गए रूढ़िवादिता रीति रिवाजों ने उसे कमजोर कर दिया है जब तक महिलाएं अपनी सुरक्षा को लेकर स्वयं खड़ी नहीं होगी, यह पुरुष प्रधान समाज उसका शोषण करता रहेगा। कहा कि जब नारी में शक्ति सारी, फिर नारी को क्यों कहे बेचारी।