मुजफ्फरनगर। मुश्किलों को छोटा और हौंसले को बड़ा कर सरवट की रहने वाली बबीता न केवल परिवार की जिम्मेदारियों में हाथ बंटा रही हैं, बल्कि अपने सपनों को भी पूरा कर रही हैं। विद्युत सखी बनकर स्वयं सहायता समूह से जुड़ीं बबीता पाल ने मेहनत और ईमानदारी के बूते सबसे ज्यादा बिल जमा कराने का लक्ष्य पूरा किया। निष्ठा और समर्पण के लिए राज्यपाल से सम्मानित होने वाली बबीता औरों के लिए मिसाल बन चुकी हैं।
दसवीं पास करते ही घरवालों ने बबीता की शादी कर दी। पढ़ने की हरसत जिम्मेदारियों के आगे दम तोड़ गई। समय बीतने के साथ चार बेटे हुए तो जिम्मेदारियों का कद और भी बढ़ता गया। अपने बच्चों को बबीता बेहतर माहौल और उच्च शिक्षा देना चाहती थी, लेकिन कमजोर अर्थतंत्र ख्वाहिशों के पूरा होने के मंत्र के आड़े आता रहा। बबीता बताती हैं कि शादी के बाद पढ़ाई छूट गई। पति जसबीर मैकेनिक हैं। घर के खर्चे बहुत मुश्किल से ही चल पाते थे। इन सब समस्याओं से दो-चार होती बबीता को स्वयं सहायता समूह के बारे में पता चला तो वर्ष 2021 सहायता समूह बनाया। लक्ष्मी नाम से बनाए स्वयं सहायता समूह में विद्युत सखी के रूप में कार्य करना शुरू किया। घर-घर जाकर लोगों से बिजली का बिल जमा कराया। सपनों की चिंगारी के साथ जज्बे के करंट का ऐसा कॉकटेल बना कि बबीता की जिंदगी जगमगा उठी। बिल जमा कराने पर अच्छा-खास कमीशन मिलने लगा तो राह आसान होती चली गई। बबीता ने मेहनत के बूते चारों बेटों को अच्छी शिक्षा दिलाई। आज उनके दो बेटे उच्च शिक्षा प्राप्त कर प्रतिष्ठित कंपनियों में काम कर रहे हैं।