मुजफ्फरनगर। छपार के गांव खोजा नंगला में साढ़े चार साल की मासूम बच्ची की अपहरण के बाद हत्या करने के मामले में एडीजे-17 कोर्ट के न्यायाधीश अंकुर शर्मा ने पिता और उसके चार पुत्रों आरोपियों को दोषी करार दिया है। पांचों दोषियों को आजीवन कारावास के साथ ही 60-60 हजार रुपये जुर्माने की भी सजा सुनाई गई है। अदालत ने जुर्माने की कुल धनराशि तीन लाख रुपये में से डेढ़ लाख रुपये पीड़ित परिवार को देने के आदेश दिए हैं।
अभियोजन पक्ष के अनुसार छपार थाना क्षेत्र के गांव खोजा नंगला निवासी मोमीन आलम की साढ़े चार साल की बेटी महविश जहां सात दिसंबर 2011 को घर से दुकान पर टॉफी लेने गई थी, जहां से वह लापता हो गई। बच्ची का सुराग नहीं लगने पर मोमीन ने महविश के अपहरण की रिपोर्ट दर्ज करा दी। कुछ दिन बाद महविश का शव देवबंद कोतवाली क्षेत्र के गांव केंदकी के जंगल से बरामद हुआ, जिस पर मुकदमे में हत्या की भी धाराओं का इजाफा कर दिया गया। जांच में गांव खोजा नंगला निवासी शकील और उसके चार बेटों हुसैन, तनवीर, परवेज और कलीम के नाम सामने आए, जिन्हें पुलिस ने गिरफ्तार कर जेल भेज दिया था। आरोपियों ने पूछताछ में पुरानी रंजिश के चलते घटना को अंजाम दिए जाने की जानकारी दी थी। पुलिस ने आरोपियों की निशानदेही पर महविश का शव बरामद किया था। वर्तमान में परवेज किसी अन्य मामले में जेल में बंद है, जबकि अन्य चारों आरोपी जमानत पर थे।
मुकदमे की सुनवाई अपर सत्र न्यायालय-17 में हुई, जिसमें एडीजीसी नीरजकांत मलिक व जोगेंद्र कुमार ने आरोपियों के खिलाफ नौ गवाह और पुख्ता साक्ष्य प्रस्तुत किए। वहीं, वादी मोमीन आलम के अधिवक्ता नासिर अली ने भी आरोपियों के खिलाफ पुख्ता सुबूत पेश किए। इनके आधार पर न्यायाधीश अंकुर शर्मा ने शुक्रवार को सभी पांचों आरोपियों को बच्ची के अपहरण व हत्या में दोषी करार दिया। एडीजीसी नीरजकांत मलिक ने बताया कि न्यायाधीश द्वारा सभी पांचों आरोपियों को बच्ची के अपहरण व हत्या में आजीवन कारावास के साथ ही 60-60 हजार रुपये जुर्माने की भी सजा सुनाई है। सभी को जेल भेज दिया गया है।