मुजफ्फरनगर। लोकसभा चुनाव में जीत के लिए जिले के जनप्रतिनिधियों ने बाहरी लोकसभा सीटों पर भी हाथ आजमाया, लेकिन जीत नसीब नहीं हुई। बसपा ने तीन नेताओं को अलग-अलग सीट से चुनाव मैदान में उतारा था, लेकिन तीनों को ही बड़े अंतर से हार का सामना करना पड़ा।
बसपा ने उत्तराखंड की हरिद्वार सीट पर मीरापुर से विधायक रहे टन्हेड़ा गांव निवासी मौलाना जमील अहमद को प्रत्याशी बनाया था। भाजपा के त्रिवेंद्र सिंह रावत ने एक लाख 64 हजार 56 मतों से जीत दर्ज की। जमील अहमद को सिर्फ 42 हजार 323 वोट मिले। बसपा प्रत्याशी छह लाख 11 हजार 485 वोटों के अंतर से चुनाव हार गए।
पुरकाजी सुरक्षित सीट से साल 2022 का विधानसभा चुनाव लड़ चुके सुरेंद्र पाल सिंह एडवोकेट को इस बार बसपा ने नगीना से प्रत्याशी बनाया था लेकिन उन्हें बड़े अंतर से हार का सामना करना पड़ा। बसपा प्रत्याशी को 13272 वोट मिले और वह करीब चार लाख 99 हजार 280 वोटों के अंतर से चुनाव हार गए। यहां पर चंद्रशेखर सांसद चुने गए।
गाजियाबाद में तीसरे स्थान पर रहे पुंडीर
लोकसभा चुनाव से ऐन पहले बसपा में शामिल हुए नंद किशोर पुंडीर को गाजियाबाद से टिकट मिला था। पुंडीर को 79 हजार 525 वोट मिले जबकि भाजपा के अतुल गर्ग से उन्हें सात लाख 74 हजार 645 वोटों के अंतर से हार मिली। पुंडीर की पत्नी कविता ने मुजफ्फरनगर लोकसभा सीट से चुनाव लड़ा और वह भी सिर्फ दो हजार वोट ही हासिल कर सकीं। हालांकि पूर्व मुख्यमंत्री मायावती की रैली के दौरान कविता पुंडीर ने बसपा प्रत्याशी को समर्थन देने की घोषणा कर दी थी।