मुजफ्फरनगर। भाजपा का गढ़ कही जाने वाली खतौली सीट पर इस बार गुर्जर, राजपूत और त्यागी बाहुल्य गांवों में वोटों का बंटवारा हो गया। सपा प्रत्याशी हरेंद्र मलिक ने इन जातियों के गांवों में बराबर वोट लिए हैं। जाट समाज के गांवों में भी उन्होंने 20 से 30 प्रतिशत तक की सेंध लगाई है।
खतौली विधानसभा सीट पर इस बार भाजपा का कोर वोट बिखर गया और विपक्षी खेमे में चला गया। राजपूत बाहुल्य गांवों में पहली बार सपा को भाजपा के बराबर और कुछ गांवों में भाजपा से अधिक वोट मिले। इनमें रतनपुरी, भूपखेडी, भायंगी गांवों में यही स्थिति रही। सठेड़ी में भाजपा की स्थिति ठीक रही। इसी तरह त्यागी बाहुल्य गांव नावला में सपा के हरेंद्र मलिक भाजपा से काफी आगे रहे।
गुर्जर बाहुल्य गांवों में इस बार सपा का परचम लहराया। गुर्जर बाहुल्य गांव मंतोडी, टिटोडा, पिपहेडा, चांदसमंद, ककराला, अंतवाडा में सपा को बराबर के वोट लिए। कुछ बूथों पर भाजपा तो कुछ पर सपा आगे रही। ऐसा पहली बार हुआ है, जब गुर्जर समाज के गांवों में इतने बड़े स्तर पर वोटोंं का बंटवारा हुआ।
सैनी बाहुल्य कुछ गांवों में बसपा को भी वोट मिले। हालांकि अधिकतम वोट भाजपा को ही मिले। जाट समाज के गांवों में हरेंद्र मलिक सीधे सेंधमारी करते दिखाई दे रहे हैं। ऐसा कोई गांव नहीं , जिसमें जाट समाज के उन्हें 20 प्रतिशत से कम वोट मिले हों। कुछ गांवों में उन्हें 30 से 40 प्रतिशत तक जाट वोट मिले।
भाजपा के कोर वोट के बिखरने और मुस्लिम वोट एकजुट पड़ने से यहां सपा भाजपा के बराबर में आकर खड़ी हो गई। बसपा ने इस सीट पर दलितों के साथ अति पिछड़ों में भी सेंधमारी की है। खतौली सीट पर भाजपा के संजीव बालियान को 83473 मत मिले हैं जबकि सपा के हरेंद्र मलिक को 80641 और बसपा के दारा सिंह प्रजापति को 37401 मत मिले हैं। भाजपा को इस सीट पर निकटतम प्रतिद्वंद्वी से मात्र 2831 मत ज्यादा मिले जबकि 2019 में यहां से भाजपा 25 हजार से अधिक मतों से जीती थी।