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महापंचायत पर टिकी नजरें : पांच सितंबर को मुजफ्फनगर में हक के लिए सड़कों पर उतरेंगे किसान, आंदोलन का चढ़ेगा पारा

Mon, 30 Aug 2021 11:59 AM IST
Dimple Sirohi न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मुजफ्फरनगर

सार

किसान आंदोलन के इतिहास की अब तक की सबसे बड़ी महापंचायत पांच सितंबर को मुजफ्फरनगर में होगी।  भारतीय किसान संघ भी आठ सितंबर को राष्ट्रव्यापी धरना प्रदर्शन करेगा। 25 सितंबर को किसान संगठनों ने भारत बंद का आह्वान किया है। बंद में किसानों के साथ मजदूर, कारखाना मजदूर भी शामिल होंगे।
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नरेश टिकैत - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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तीन कृषि कानूनों के विरोध में पिछले नौ महीने से चल रहे किसान आंदोलन का पारा सितंबर में खूब चढ़ेगा। पांच सितंबर को संयुक्त किसान मोर्चा की मुजफ्फरनगर में किसान महापंचायत होगी। यही नहीं 25 सितंबर को किसान संगठनों ने भारत बंद का आह्वान किया है। भारतीय किसान संघ भी आठ सितंबर को राष्ट्रव्यापी धरना प्रदर्शन करेगा। प्रदेश सरकार की भी किसान महापंचायत पर नजर है। भाजपा किसान मोर्चा किसानों के साथ संवाद कार्यक्रम चलाएगा।

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गन्ना पेराई सत्र शुरू होने से पहले किसानों ने सरकार को घेरने की तैयारी कर ली है। दिल्ली के बॉर्डर पर जमे किसानों की 22 जनवरी के बाद से सरकार से बातचीत नहीं हो सकी है। संयुक्त किसान मोर्चा की मुजफ्फरनगर महापंचायत में देशभर के किसान शामिल होंगे। भाकियू ने पूरी ताकत झोंक दी है। महापंचायत में न केवल कृषि कानूनों के लिए आगामी रणनीति तय होगी, बल्कि पंजाब की तरह गन्ने का रेट बढ़वाने के लिए भी आंदोलन की घोषणा हो सकती है। 

आरएसएस के भारतीय किसान संघ ने भी सरकार की परेशानी को यह कहकर और बढ़ा दिया है कि वह भी एमएसपी को कानूनी जामा पहनाने की मांग को लेकर देश के 500 से ज्यादा जनपदों में एक साथ धरना     प्रदर्शन करेगा। 25 सितंबर के भारत बंद में मोर्चा के साथ मजदूर फेडरेशन भी आ गए हैं। महापंचायत पर सरकार की ही नहीं, बल्कि संयुक्त किसान मोर्चा से अलग चल रहे किसान संगठनों की भी नजर लगी है।

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ट्रैक्टर से पहुंचेंगे मुजफ्फरनगर 
महापंचायत को लेेकर किसानों में उत्साह है। पंजाब, हरियाणा, उत्तराखंड और राजस्थान के किसान जहां बसों के जरिए पहुंचेंगे, वहीं पश्चिमी यूपी के किसान अपने ट्रैक्टरों पर सवार होकर महापंचायत में जाएंगे। भाकियू तैयारी में जुटी है।

पंजाब की तर्ज पर मांग रहे गन्ना मूल्य
पंजाब सरकार ने गन्ना मूल्य बढ़ा दिया है। किसान संगठनों ने इसे आंदोलन की जीत बताया है। यूपी में पिछले तीन पेराई सत्र से गन्ने का रेट नहीं बढ़ा है। पेराई सत्र 2021-22 के लिए गन्ना मूल्य की घोषणा होनी है। किसान आंदोलन के जरिए सरकार पर दबाव बनाने की तैयारी कर रहे हैं।

तीन कृषि कानूनों को लेकर पिछले नौ महीने से चल रहे किसान आंदोलन को मजबूत करने में अखिल भारतीय किसान सभा की केंद्रीय कमेटी के सदस्य डीपी सिंह की खास भूमिका है। उनका कहना है कि किसान आंदोलन से भाईचारा बहाल हुआ है।

मुजफ्फरनगर में पांच सितंबर को होने वाली किसान पंचायत एतिहासिक होगी। अब यह आंदोलन किसानों के साथ खेती पर निर्भर लोगों का भी आंदोलन बन गया है। किसानों को खालिस्तानी और तालिबानी बताकर आंदोलन को कुचलने का कुचक्र रचा जा रहा है।
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किसान महापंचायत की तैयारियों का जायजा लेकर मुजफ्फरनगर से गाजीपुर बॉर्डर लौट रहे डीपी सिंह ने अमर उजाला के साथ बातचीत की। उन्होंने कहा कि आंदोलन जितना लंबा होता जा रहा है, उतना ही मजबूत भी हुआ है। 

22 जनवरी के बाद से किसानों की सरकार से बात नहीं हो सकी है, लेकिन अब यह आंदोलन हरियाणा, पंजाब, राजस्थान और पश्चिमी यूपी का नहीं रह गया है, बल्कि पूरे देश का आंदोलन बन गया है। सिंघु बॉर्डर पर एक हजार से ज्यादा तमिलनाडु के किसानों ने डेरा जमा लिया है। अब यह आंदोलन जन आंदोलन में तब्दील होने लगा है।

किसान आंदोलन के इतिहास की अब तक की सबसे बड़ी महापंचायत मुजफ्फरनगर में होगी। 25 सितंबर को भारत बंद की घोषणा पर कहा कि बंद में किसानों के साथ मजदूर, कारखाना मजदूर भी शामिल होंगे। संयुक्त किसान मोर्चा को अब तक 10 से ज्यादा मजदूर फेडरेशनों का समर्थन मिल चुका है। 

तीनों कृषि कानूनों से किसान ही नहीं, बल्कि सार्वजनिक वितरण प्रणाली भी ध्वस्त हो जाएगी। आंदोलन किसानों को मुद्दों पर बोलना और हक के लिए सवाल उठाना भी सिखा रहा है।  केंद्र सरकार पर गल्ले का कारोबार करने वाली कंपनियों का भारी दबाव है।

ये कंपनियां नहीं चाहती कि सरकार इन कानूनों को वापस लें। यह पहला मौका है जब किसान संगठनों का इतना बड़ा मंच एक साथ संगठित होकर सरकार के सामने डटकर खड़ा है। किसानों ने ठान लिया है, जब तक कानून वापसी नहीं तब तक घर वापसी नहीं।
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