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कुष्ठ उन्मूलन दिवस : कुदरत के साथ व्यवस्था की भी मार

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इंट्रो : बीमारी की शक्ल में कुदरत की मार झेल रहे कुष्ठ रोगियों को व्यवस्था से भी न्याय नहीं मिल पा रहा। कुष्ठ आश्रम के कच्चे और जर्जर हो चुके छोटे-छोटे घरौंदों में समय काट रहे लोगों की सिर पर मजबूत छत पाने की हसरत पूरी नहीं हो पा रही। हर साल कुष्ठ उन्मूलन दिवस मनाया जाता है। अफसर और जनप्रतिनिधि आश्रम में आते हैं लेकिन कोरे आश्वासन के सिवा कुछ नहीं मिल पाता।
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मुजफ्फरनगर। रुड़की रोड स्थित राधा-कृष्ण आश्रम में 10 गुणा 11 फीट आकार के 50 कमरे बने हैं। इनमें से 33 कमरे पूरी तरह कच्चे हैं। कमरों के आगे टिन डालकर बरामदा बना दिया गया है। आगे पर्दे टांगे हैं। इन कमरों में 100 कुष्ठ रोगी और उनके परिवार के तीन से चार सदस्य रहते हैं। कुष्ठ आश्रम समिति के अध्यक्ष तपन बताते हैं कि कुष्ठ रोगियों के लगभग 100 बच्चे हैं, जिनमें से लगभग 70 बाहर रहते हैं और 30 अपने माता-पिता के साथ हैं। हालात इस कदर खराब हैं कि छोटे-छोटे कमरों में सामान रखने की भी जगह नहीं है। खाना भी टिननुमा बरामदे में बनाते हैं। बारिश होते ही सारे कमरे टपकने लगते हैं। इसलिए छत पर पन्नी डालकर समय काट रहे हैं। इससे भी बारिश का पानी नहीं रुकता। शिव कुमार मंडल, अरविंद कुमार, सूरज, दादूलाल, फूलचंद, राधेश्याम, उदय, देवानंद, मधुसूदन आदि के मकान बेहद जर्जर हैं।
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प्रधानमंत्री आवास योजना का मिले लाभ
आश्रम में रह रहे कुष्ठ रोगी प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत मकान बनवाने की मांग कर रहे हैं। उनका कहना है कि इस संबंध में जनप्रतिनिधियों के साथ ही पिछले साल डीएम से भी अपनी समस्या बताई लेकिन समस्या का समाधान नहीं हुआ।
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दानदाताओं के रहमोकरम पर गुजार रहे जीवन
कुष्ठ आश्रम समिति के अध्यक्ष बताते हैं कि सभी कुष्ठ रोगियों का जीवन दानदाताओं के रहमो करम पर चल रहा है। दान में मिली राशि से 17 आवास बनवा रहे हैं। केंद्रीय राज्यमंत्री डॉ. संजीव बालियान, राज्यमंत्री स्वतंत्र प्रभारी ने दो-दो तथा उद्यमी भीमसेन कंसल ने छह आवास बनवाने का काम शुरू किया है, लेकिन ये पर्याप्त नहीं हैं। समिति के पास जमीन उपलब्ध है जिस पर सरकारी योजना से आवास बन सकते हैं।
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