पाल ने पीटीआई-भाषा को बताया, 'यह आय का एक अच्छा स्रोत था क्योंकि इस मौसम में अन्य नौकरियां ढूंढना बहुत मुश्किल होता है, क्योंकि मानसून के मौसम में निर्माण और कृषि कार्य ज्यादा नहीं होते हैं, जहां मुझे एक मजदूर के रूप में नौकरी मिल सके। मैंने एक सप्ताह पहले ही ढाबे पर काम करना शुरू किया था, लेकिन अब मालिक ने मुझे कहीं और काम तलाशने के लिए कहा है।'
छोटे फल विक्रेताओं और ढाबों को डर है कि सरकार के इस कदम से उनकी कमाई बुरी तरह प्रभावित होगी। ढाबे के मालिक अरसलान ने कहा कि उन्हें डर है कि उनके मुस्लिम नाम के कारण कांवड़िए उनके यहां खाना नहीं खाएंगे। इस मार्ग पर हर तीसरे ढाबे की तरह, मेरे ढाबे का नाम बाबा का ढाबा है। मेरे आधे से अधिक कर्मचारी हिंदू हैं। हम यहां केवल शाकाहारी भोजन परोसते हैं और श्रावण (मानसून) के दौरान लहसुन और प्याज का उपयोग करने से भी बचते हैं।
सरकार के आदेश ने न केवल मुस्लिम मालिकों और उनके कर्मचारियों की कमाई पर असर डाला है, बल्कि हिंदू मालिकों के भोजनालयों में काम करने वाले मुस्लिम कर्मचारियों पर भी असर डाला है।
खतौली में मुख्य बाजार के ठीक बाहर सड़क किनारे भोजनालय के मालिक अनिमेष त्यागी ने कहा, 'एक मुस्लिम व्यक्ति मेरे रेस्तरां में तंदूर पर काम करता था। लेकिन इस मुद्दे के कारण, मैंने उसे जाने के लिए कहा। क्योंकि लोग इसे मुद्दा बना सकते हैं। हम यहां ऐसी परेशानी नहीं चाहते हैं। इस बार तंदूर पर काम करने के लिए एक हिंदू व्यक्ति को बुलाया है।