मुजफ्फरनगर में जज रवि कुमार दिवाकर का फास्ट ट्रैक कोर्ट से परिवार न्यायालय में तबादला किया गया है। इलाहाबाद हाईकोर्ट के आदेश पर प्रदेशभर में 60 से अधिक न्यायिक अधिकारियों के दायित्व बदले गए हैं।
छह अप्रैल से सात सितंबर तक 10 मामलों में 23 दोषियों को फांसी की सजा सुनाकर देशभर में सुर्खियों में आए जज रवि कुमार दिवाकर का फास्ट ट्रैक कोर्ट से तबादला कर दिया गया है। इलाहाबाद हाईकोर्ट के रजिस्ट्रार जनरल मंजीत सिंह श्योराण के आदेश के बाद अब वह परिवार न्यायालय के न्यायाधीश होंगे। उनकी जगह जज शिव कुमारी को फास्ट ट्रैक कोर्ट में नियुक्त किया गया।
जज दिवाकर की अदालत से 18 अगस्त को तत्कालीन जिला जज बीरेंद्र कुमार सिंह ने हत्या की 97 पत्रावलियां रिकॉल कर ली थी। इसके बाद जिला जज सेवानिवृत्त हो गए।
पत्रावलियां रिकॉल करने के बाद जज ने सवाल उठाते हुए एक फैसले के दौरान लिखा था कि सवाल केवल प्रकरणों को प्रशासनिक आधार पर रिकॉल करने की शक्ति का नहीं है, बल्कि उस शक्ति के प्रयोग के आधार का है।
न्याय विभाग में यह भी किया फेरबदल
परिवार न्यायालय के मुख्य जज खलीकुज्जमां अब औरैया जिले में पीठासीन अधिकारी बनाए गए। इनके स्थान पर औरैया से पीठासीन अधिकारी रजनीश कुमार को जिले में परिवार न्यायालय के मुख्य जज के पद पर आसीन होंगे।
अपनी सुरक्षा में कटौती पर उठा चुके सवाल
जज रवि कुमार दिवाकर ने अपने एक आदेश में खुलकर नाराजगी जताई कि लगातार खतरों के बावजूद स्थानीय पुलिस ने उनकी सुरक्षा में कटौती कर दी है। उन्होंने अपनी सुरक्षा की तुलना बरेली और वाराणसी की पोस्टिंग के दौरान मिली सुरक्षा से की और इसे अपर्याप्त बता चुके हैं।