मुजफ्फरनगर। झज्जर के पहलवान अमन सहरावत ने कुश्ती में कांस्य पदक जीतकर देश का नाम ऊंचा कर दिया। कामयाबी में बरवाला गांव के द्रोणाचार्य अवार्डी चीफ कोच जगमिंद्र सिंह की खास भूमिका रही। वह कहते हैं कि अमन की लगन उसे खास पहलवान बना देती है। आने वाले सालों में वह और भी पदक जीतकर दिखाएगा।
पेरिस ओलंपिक के लिए जगमिंद्र सिंह को फ्री स्टाइल वर्ग का चीफ कोच बनाया गया था। पुरुष वर्ग में इकलौते पहलवान हरियाणा के झज्जर के अमन सहरावत ने क्वालीफाई किया था। पिछले कुछ सालों में अमन के स्वर्णिम प्रदर्शन और कड़ी मेहनत को देखते हुए पेरिस रवानगी से पहले ही चीफ कोच ने पदक का प्रबल दावेदार बताया था।
अमन ने खुद को साबित कर दिखाया। महिला वर्ग में विनेश फोगाट के वजन को लेकर शुरू हुए विवाद के बाद अमन ने कुश्ती में पहला पदक दिलाया। इसके लिए मुख्य प्रशिक्षक के तौर पर जगमिंद्र सिंह की भूमिका की खूब सराहना हुई।
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जगमिंद्र सिंह के पास पांच ओलंपिक का अनुभव
मुजफ्फरनगर। अपने दौर में अखाड़ा कुश्ती के दिलेर पहलवान रहे जगमिंद्र सिंह के पास खिलाड़ी और कोच के तौर पर पांच ओलंपिक का अनुभव है। वर्ष 1980 में मास्को, 1984 में लांस एंजिल्स ओलंपिक में वह खिलाड़ी के तौर पर शामिल हुए थे। इसके बाद साल 2004 के एथेंस, 2016 के ब्राजील, 2020 के टोक्यो और इस साल पेरिस ओलंपिक में चीफ कोच के तौर पर शामिल हुए। ब्यूरो
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खुद पदक से चूके और देश को दिलाए तीन मेडल
मुजफ्फरनगर। साल 1984 में लॉस एंजिल्स ओलंपिक में जगमिंद्र सिंह फ्री स्टाइल कुश्ती में अंतिम क्षणों में पिछड़कर कांस्य पदक से चूक गए और उन्हें चौथे स्थान पर संतोष करना पड़ा था। खेल के लिए दी गई उनकी सेवाओं के लिए अर्जुन और द्रोणाचार्य अवार्ड दिया गया। ओलंपिक के लिए उन्हें कोच बनाया गया तो पदक दिलाने में अहम भूमिका रही। फ्री स्टाइल वर्ग में पहलवान रवि दहिया ने रजत, बजरंग पूनिया ने कांस्य जीता था। इस बार अमन सहरावत ने कांस्य जीता। ब्यूरो
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