मुजफ्फरनगर। लोकसभा में गूंजा शहर की बेशकीमती 570 बीघा जमीन का विवाद 82 साल पुराना है। वर्ष 1942 में नवाब शमशेर जंग सज्जाद अली ने तत्कालीन एमएलसी लाला दीपचंद के पक्ष में एग्रीमेंट किया था। मनमुटाव होने पर नवाब ने जमीन लाला दुर्गा प्रसाद को बेच दी। यहीं से पहली बार जमीन के लिए अदालती लड़ाई शुरू हुई। पिछले 82 साल में जमीन के मालिक बदलते रहे। 2019 में शत्रु संपत्ति बताए जाने पर प्रशासन ने जमीन के क्रय-विक्रय पर रोक लगा रखी है, जिससे आठ कॉलोनियों के लोग परेशान हैं।
वर्ष 1942 में तत्कालीन नवाब ने एग्रीमेंट तोड़कर संपत्ति को दुर्गा प्रसाद को विक्रय कर दिया था। बंटवारा हुआ तो नवाब का परिवार पाकिस्तान चला गया। लाला दीपचंद ने हाईकोर्ट में अपील दाखिल की। वर्ष 1949 में लाला दुर्गा प्रसाद के पक्ष में की गई सेल डीड को निरस्त कर दिया गया। 1950 में लाला दीपचंद को न्यायालय के माध्यम से बैनामा मिला।
लाला दीप चंद को स्वामित्व मिलने के बाद शिक्षण संस्थान और कॉलोनियां इस क्षेत्र में बसाई गईं। सरकार ने इस क्षेत्र में लाला दीपचंद और उनके परिवार से समय-समय पर भूमि अधिग्रहण भी किया।
प्रशासन की ओर से साल 2017 में शत्रु संपत्ति प्रतीत होने का नोटिस जारी किया, लेकिन मामला ठंडे बस्ते में चला गया। वर्ष 2019 में सामाजिक कार्यकर्ता राधेश पप्पू ने शत्रु संपत्ति विभाग को शिकायत की। गृह मंत्रालय ने जांच शुरू कराई। प्रशासन ने आठ कॉलोनियों के क्षेत्र में संपत्ति के क्रय-विक्रय पर रोक लगा दी। पांच साल से रोक लागू है। करीब 10 हजार से अधिक परिवारों का मामला लोकसभा में उठाए जाने बाद फिर सुर्खियों में आ गया है।
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इन कॉलोनियों के लोग हो रहे प्रभावित
शहर के पटेलनगर, द्वारिकापुरी, आदर्श कॉलोनी, साकेत, नई मंडी, गांधी कॉलोनी, लाला दीपचंद कॉलोनी और शिवपुरी क्षेत्र के लोग परेशान हैं। इन क्षेत्र में जमीन के क्रय-विक्रय पर भी प्रशासन की ओर पिछले पांच साल से रोक लगी हुई है।
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यह संस्थान भी इसी इलाके में शामिल
एसडी कॉलेज, ब्राह्मण कॉलेज के अलावा पुलिस लाइन भी विवादित जमीन के क्षेत्र में है।
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क्या था मामला
सपा सांसद हरेंद्र मलिक ने लोकसभा में शहर के द्वारिकापुरी और गांधी कॉलोनी का मुद्दा उठाते हुए कहा था कि सत्तासीन व्यक्ति की मिलीभगत से पांच सौ साल पुराने आबादी क्षेत्र को शत्रु संपत्ति घोषित कर दिया गया है। मामले में पूर्व मंत्री डॉ. संजीव बालियान ने कहा था कि दो माह से जिले में भूमाफिया सक्रिय हो गए हैं। उन्होंने एक परिवार की तरफ भी इशारा किया था।
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इन कॉलोनियों की जमीन शत्रु संपत्ति नहीं : अनिल
कारोबारी अनिल स्वरूप ने प्रेस बयान जारी करते हुए दावा किया कि लाला दीपचंद और उनके वारिसों से ही करीब 30-35 साल पहले 25 हजार गज जमीन बैनामे से खरीदी थी। इन कॉलोनियों की जमीन शत्रु संपत्ति नहीं है। हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट के आदेश की प्रतियां सुरक्षित हैं। कुछ लोग उनकी संपत्ति की तरफ इशारा करते हैं, जबकि यह गलत है।
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पाकिस्तान के पहले प्रधानमंत्री से नाता
शत्रु संपत्ति विभाग से की गई शिकायत में कहा गया था कि मोहम्मद सज्जाद खां पुत्र रुस्तम अली खां के नाम करीब 570 बीघा जमीन थी। नवाब शमशेर जंग सज्जाद अली खां पाकिस्तान के पहले प्रधानमंत्री लियाकत अली खां के भाई थे। समाजसेवी राधेश पप्पू ने हाईकोर्ट में रिट याचिका दाखिल की है। यह भी कहा गया है कि मार्च 1947 से पहले पाकिस्तान चले गए थे, इस वजह से निष्पादित विक्रय पत्र अवैधानिक है।
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