विधानसभा चुनाव 2017 के लिए रालोद का टारगेट जाटों की गोलबंदी है। अभी तक का इतिहास रहा है कि अजित सिंह जब भी चुनाव हारे, अगली बार जाट बिरादरी उतने ही आक्रामक तरीके से एकजुट हुई। चरथावल रैली में दिए गए भाषणों से किसानों का सम्मान और स्वाभिमान जगाकर रालोद के पक्ष में एकजुट होने का संदेश दिया गया। इस चुनाव में रालोद की अतिपिछड़ों और मुसलमानों को साथ जोड़कर मैदान में उतरने की तैयारी है।
चरथावल की किसान अधिकार रैली में वक्ताओं ने मंच से जिस तरह भाषण दिया, उसका पूरा सार जाटों को पूरी तरह रालोद के पक्ष में गोलबंद करना रहा। बीते लोकसभा चुनाव में दंगे के हालात में जाट बिरादरी जिस तरह बीजेपी के पक्ष में खिसक गई, उससे रालोद को भारी नुकसान हुआ। इससे पहले भी जब छोटे चौधरी की हार हुई तो आगामी चुनाव में पूरी बिरादरी एकजुट दिखाई दी। दंगे के बाद हालात बदल चुके हैं। रालोद ने एक बार फिर पुराने समीकरण बनाने शुरू कर दिए हैं।
रालोद के केंद्र में अब जयंत चौधरी को रखा गया है। बिरादरी भी अब उन्हीं में अपना भविष्य देख रही है। वक्ताओं ने रैली में यह बताने का प्रयास भी किया कि रालोद की सियासत अब जयंत चौधरी के हाथों में है। जदयू के केसी त्यागी ने तो यहां तक कह दिया कि दूसरे दल तैयार बैठे हैं, बस आप लोगों की ताकत चाहिए। अब देखना यह है कि जाट समाज रालोद के पक्ष में गोलबंद होता है या फिर बीजेपी की तरफ खिसकता है।