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गन्ना किसानों, मिलों को बर्बाद होने से बचाया था जेटली ने

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गांधी नगर स्थित कार्यालय पर पूर्व वित्त मंत्री को श्रद्वांजलि देते भाजपाई। - फोटो : MUZAFFARNAGAR
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मुजफ्फरनगर। केंद्रीय राज्य मंत्री डॉ संजीव बालियान का कहना है कि अरुण जेटली को राष्ट्र और किसानों की बड़ी चिंता थी। 2014 में जब देश में बाहर से आ रही रॉ शुगर के कारण चीनी के दाम घटकर 22 रुपये किलो आ गए थे। चीनी मिलों और किसानों के सामने संकट पैदा हो गया था। ऐसे हालात में अरुण जेटली ने रॉ शुगर पर प्रतिबंध लगाकर किसानों के हक में बड़ा काम किया था।
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भाजपा के वरिष्ठ नेता अरुण जेटली के निधन पर केंद्रीय राज्यमंत्री डॉ संजीव बालियान ने कहा कि देश का किसान उन्हें हमेशा याद करेगा। 2014 में चीनी मिले आर्थिक मंदी से जूझ रही थी। चीनी के 22 रुपये किलो आने से घाटे के चलते किसानों का भुगतान नहीं हो पा रहा था। यह मामला पीएम नरेंद्र मोदी के सामने उन्होंने स्वयं रखा। पीएम ने तत्कालीन वित्त मंत्री अरुण जेटली की अध्यक्षता में एक कमेटी गठित की। इस कमेटी में केंद्रीय मंत्री मेनका गांधी, रामविलास पासवान और उन्हें रखा गया था। जो कंपनियां रॉ शूगर ला रही थी उनका काफी दबाव था। नियम यह था कि रॉ शुगर को तैयार करके वापस विदेश भेजना था, लेकिन इसके 18 माह का समय था। इस बीच चीनी भारत में ही बेची जा रही थी।
अरुण जेटली की अध्यक्षता में बनी कमेटी ने इस पर प्रतिबंध लगाया और रॉ शुगर के इंपोर्ट पर 100 प्रतिशत ड्यूटी लगा दी। चीनी के दामों को देश में स्थिर किया गया। रॉ शुगर का कारोबार करने वाली देश की बड़ी कंपनी शारदा सहित सभी दिवालिया घोषित हुई। बड़े दबाव के बीच जेटली ने राष्ट्र और किसान हित में कड़ा फैसला लिया। उनके इस निर्णय से चीनी उद्योग बर्बाद होने से बच गया और किसानों के सामने जो गन्ने की खेती का संकट पैदा हो गया था उससे मुक्ति मिली। किसान उनके इस निर्णय को हमेशा याद रखेगा।
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