मुजफ्फरनगर। जैन मुनि विशोक सागर ने कहा कि जैन समाज प्राचीन धर्म है। संथारा एक धार्मिक प्रक्रिया है, आत्महत्या नहीं है। संथारा में जो समाधि ली जाती है वह मोक्ष की ओर ले जाती है, आत्महत्या करने वाला नरक में जाता है।
मुनीम कॉलोनी स्थित जैन मंदिर में पत्रकारों से वार्ता में उन्होंने कहा कि जैन धर्म भगवान आदिनाथ के समय से है। जैन समाज की धार्मिक क्रियाएं सभी तीर्थंकरों ने अपनाई। भगवान महावीर के बाद भी जैन संत इन धार्मिक क्रियाओं को अपनाते हैं। संथारा विधि कुछ परिस्थितियों में प्रयोग होती है।
इसमें यदि जंगल में जानवरों से घिर गए और बचने का कोई उपाय न हो तो जैन मुनि समाधि ले लेता है। दूसरे यदि कहीं मनुष्य ने हमला कर दिया और बचने का कोई उपाय न हो तो तब इस धार्मिक क्रिया का पालन होता है।
तीसरे देव के हमला करने पर और चौथे बिजली गिरने, भूकंप, अकाल आदि में बचने के उपाय न होने पर समाधि लेकर चारों तरह के आहार बंद कर दिए जाते हैं। जैन धर्म में असाध्य रोग होने और खड़े होकर भोजन करने की स्थिति में न रहने पर जैन मुनि समाधि ले लेते हैं।
जैन मुनि ने कहा कि आत्महत्या और समाधि लेने में भारी अंतर है। संथारा माध्यम से जैन मुनि इस नश्वर शरीर का परित्याग करते हैं, जिसे इस मानव समाज में मृत्यु महोत्सव के रूप में मनाया जाता है। राजस्थान हाईकोर्ट के फैसले से समस्त जैन समाज आहत है। देश में धार्मिक स्वतंत्रता का अधिकार सभी को है।
जैन समाज 24 अगस्त को टाउन हाल में एकत्र होगा। मौन जुलूस निकालकर राष्ट्रपति के नाम डीएम को ज्ञापन दिया जाएगा। वार्ता के दौरान अशोक कुमार जैन, जितेंद्र उर्फ टोनी जैन, विकास जैन, दिनेश जैन, विभोर जैन, सत्यपाल जैन आदि का सहयोग रहा।