देवबंद (सहारनपुर)। मजहब के नाम पर दो वर्गों के बीच नफरत की दीवारें खड़ी करने की चाहे जितनी भी कोशिशों हो रहीं हों, लेकिन अभी बहुत लोग ऐसे हैं जो इन साजिशों से बहुत दूर रहकर इंसानियत को ही सबसे बड़ा धर्म समझते हैं। शुक्रवार को मानकी गांव के नानू ने ऐसी ही मिसाल पेश की। घर से बिना बताए गई दूसरे वर्ग की किशोरी को हरिद्वार में नानू व उसका परिवार मिला जिसने उसे परिजनों तक सकुशल पहुंचा दिया। हिंदू जागरण मंच समेत अन्य संगठन उक्त परिवार की जमकर प्रशंसा कर रहे हैं।
नगर के एक मोहल्ला निवासी 14 वर्षीय किशोरी घर से बिना बताए चली गई और भटकते हुए हरिद्वार पहुंच गई। यहां उसने दो दिनों तक नौकरी तलाश करने की कोशिश की, लेकिन कम उम्र होने के चलते उसे किसी ने नौकरी पर नहीं रखा। उसके पास रहने का भी कोई ठिकाना नहीं था। जिसके चलते किशोरी एक स्थान पर बैठी हुई सर्दी में ठिठुर रही थी। किसी काम से हरिद्वार गए नानू व उसके परिवार से किशोरी की मुलाकात हो गई। जब नानू नेे किशोरी से उसके बारे में पूछा तो वह रोने लगी और उसने बताया कि वह घर से बिना बताए नौकरी की तलाश में चली आई थी, लेकिन उसे कोई भी नौकरी देने को तैयार नहीं उसके पास रहने तक की जगह नहीं है। शुक्रवार को वापस लौटा नानू का परिवार किशोरी को अपने साथ देवबंद ले आया और कचहरी परिसर में हिंदू जागरण मंच के प्रदेश उपाध्यक्ष ठाकुर सुरेंद्रपाल सिंह एडवोकेट के पास लेकर पहुंचा और किशोरी को उनके सुपुर्द कर दिया। सुरेंद्रपाल सिंह ने किशोरी से पूछताछ करने के बाद उसके परिजनों से संपर्क किया और किशोरी को उनको सौंप दिया। नानू के इस कार्य की हिंजामं समेत अन्य संगठन जमकर सराहना कर रहे हैं, जबकि नानू का कहना है कि इंसानियत सबसे बड़ी चीज होती है।