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छापा पड़ते ही कपड़ा बाजार में ताले लटके, कार्रवाई के विरोध में व्यापारियों ने दुकानें की बंद  

Tue, 26 Sep 2017 12:24 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो/ मुजफ्फरनगर
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आयकर विभाग की छापामारी का विरोध करते व्यापारी। - फोटो : अमर उजाला
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आयकर विभाग का छापा पड़ते ही एसडी मार्केट समेत कई बाजारों में दुकानों पर ताले लटक गए। कुछ व्यापारी दहशत में दुकानें बंद कर खड़े हो गए तो कुछ विरोध में उतर आए। घंटेभर में शहर का कपड़ा बाजार पूरी तरह से बंद हो गया। व्यापारियों ने एकत्र होकर एसडी मार्केट में धरना दिया, यहां पर केंद्र सरकार के खिलाफ नारेबाजी कर व्यापारियों का उत्पीड़न किए जाने का आरोप लगाया।  
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न्यू एसडी मार्केट एसोसिएशन के प्रधान अनिल नामदेव के नेतृत्व में व्यापारियों ने एसडी मार्केट पहुंचकर आक्रोश जताया। भाजपा सरकार और नरेंद्र मोदी के खिलाफ भी जमकर नारेबाजी की गई। विरोध में व्यापारी मार्केट में धरने पर बैठ गए। कहा कि जीएसटी में कपड़ा कारोबार पर टैक्स लगाकर पहले ही व्यापारियों की कमर तोड़ दी गई। कपड़ा कारोबारी आयकर विभाग के छापे के बाद एकजुट नजर आए। लाल सिंह बाजार, एसडी बाजार, मोलाहेड़ी, भगतसिंह रोड, नरजीत मार्केट में व्यापारियों ने अपनी दुकानों को बंद कर दिया।

धरने पर वित्त मंत्री को लेकर भी नाराजगी जाहिर की गई। व्यापारियों ने साफ कहा कि वह कोई चोर नहीं हैं। वैध रूप से अपना कारोबार चला रहे हैं। इस तरह से छापेमारी कर परेशान किया जाएगा तो व्यापारी शांत नहीं बैठेंगे। कपड़ा बाजार की शहर में करीब 400 से अधिक दुकाने हैं, जो सोमवार को बंद रहीं।
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धरने में कपड़ा व्यापार संघ के अध्यक्ष अनिल नामदेव, राकेश कंसल, अशोक छाबड़ा, अजय मदान, योगेश भगत, रविन्द्र जैन, विजय तागरा आदि ने इस तरह से व्यापारियों को परेशान किए जाने पर उग्र आंदोलन की चेतावनी दी। छापेमारी के दौरान एकत्र व्यापारियों के आक्रोश को देखते मार्केट में पीएसी तक तैनात रखी गई।  

जीएसटी के बाद सामने आया कारोबारी चिट्ठा
केंद्र की मोदी सरकार में हुई नोटबंदी और बाद में जीएसटी ने कारोबार के तरीकों की कलई खोल दी। शहर में जारी आयकर के छापों का राज जीएसटी में छिपा है। आयकर के रडार पर कपड़ा व्यापारी और चिकित्सकों के साथ शहर में कई बड़े उद्योग बताए गए हैं। उधर, आयकर के साथ वाणिज्य कर विभाग भी व्यापारियों के खातों पर निगाह जमाए हुए है। अंदरूनी तौर पर दोनों ही विभाग कारोबारियों के लेनदेन और टैक्स दस्तावेजों को खंगाल रहे हैं।        

नोटबंदी के बाद जीएसटी लागू की गई। उसके बाद बैंक एकाउंट को आधार कार्ड से लिंक किया गया। अब पैन कार्ड को आधार से जोड़ा जा रहा है। इन सभी प्रक्रिया के पीछे कारोबारियों और व्यापारियों से लेकर बैंक एकाउंट होल्डरों की कुंडली पलभर में खंगाली जा सकती है। आधार कार्ड के विशेष कोड के माध्यम से क्षणभर में किसके पास कितने खाते, क्या लेनदेन और कितना बड़ा व्यापारी है, यह सब पता लगाना बेहद आसान हो गया है। वहीं, पैनकार्ड से आधार लिंक होने पर टैक्स की स्थिति का पता लगाया जा सकता है।

ऐसे में माना जा रहा है कि जीएसटी पोर्टल, बैंक एकाउंट और पैन कार्ड तीनों में आधार कार्ड से डिटेल जुटाकर आयकर विभाग कार्रवाई में लगा है। सूत्रों के अनुसार जीएसटी के पोर्टल पर आईडी बनने के बाद पूरे कारोबार का चिट्ठा अफसरों के सामने आ गया है। ऐसे में आयकर विभाग भी शहर के बड़े उद्योगपतियों, कारोबारियों को टारगेट कर रहा है। जीएसटी को लेकर भी विभाग जांच-पड़ताल करेगा, लेकिन फिलहाल केंद्र सरकार ने व्यापारियों को 30 सितंबर तक राहत दे रखी है। आयकर विभाग के रडार पर कई और बड़े कारोबारी बताए जा रहे हैं, जिन पर विभाग की नजर टेढ़ी हो गई है।        
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