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स्वतंत्रता आंदोलन में पति पत्नी ने सही थी जेल की यातनाएं

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मंसूरपुर के गांव दौलतपुर निवासी स्वतंत्रता सेनानी रामप्रसाद। फाइल फोटो - फोटो : MUZAFFARNAGAR
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स्वतंत्रता आंदोलन में पति पत्नी ने सही थी जेल की यातनाएं
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मुजफ्फरनगर, मंसूरपुर। देश को अंग्रेजों के दमनकारी शासन से आजादी दिलाने के लिए स्वतंत्रता आंदोलन में अनेक युवक-युवतियों ने यातनाएं झेली थीं। मंसूरपुर क्षेत्र के गांव दौलतपुर निवासी रामप्रसाद तथा उनकी पत्नी ने भी स्वतंत्रता आंदोलन में भाग लेते हुए जेल में यातनाएं सही थीं। राम प्रसाद की पत्नी खजानी देवी ने स्वतंत्रता आंदोलन के दौरान बरेली जेल में रहते हुए एक पुत्र को जन्म दिया था।
राष्ट्रपिता महात्मा गांधी द्वारा देश को आजाद कराने के लिए अगस्त 1942 में शुरू किए गए भारत छोड़ो आंदोलन में देश के अन्य क्रांतिकारियों की तरह मंसूरपुर क्षेत्र के गांव दौलतपुर निवासी रामप्रसाद और उनकी पत्नी खजानी देवी ने भी भाग लिया था। स्वतंत्रता सेनानी स्वर्गीय राम प्रसाद के पौत्र चांदवीर सिंह बताते हैं कि उनके बाबा रामप्रसाद ने महात्मा गांधी की नीतियों से प्रेरित होकर उनके आह्वान पर स्वतंत्रता आंदोलन में भाग लिया था। इस दौरान वे कई बार जेल गए। जब उनके बाबा रामप्रसाद जेल चले गए तो उनकी दादी खजानी देवी भी महिलाओं का जत्था लेकर अंग्रेजों के विरुद्ध नारे लगाते हुई सड़क पर उतर आईं। उनकी दादी खजानी देवी को बरेली जेल मे भेज दिया गया।
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उनके चाचा रंजीत सिंह का जन्म बरेली जेल में हुआ था। वर्ष 1964 में 57 वर्ष की उम्र में उनके दादा का निधन हो गया। चांदवीर बताते हैं कि उनके बड़े भाई स्वर्गीय चंद्रपाल फौजी जब फौज में भर्ती हुए थे तो उन्हें बाबा राम प्रसाद के स्वतंत्रता सेनानी होने का लाभ मिला था।
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