तेरह साल पहले दर्ज हुए वाद में कोर्ट में पेश नहीं होने पर एसीजेएम द्वितीय ने मुरादाबाद पीटीएस में तैनात आईजी भजनीराम मीणा के फिर से एनबीडब्ल्यू जारी किए हैं। न्यायालय ने इस बार प्रदेश के प्रमुख सचिव गृह के साथ डीजीपी को भी इस संबंध में पत्र भिजवाया है, जिसमें आईजी मीणा को गैर जमानती वारंट तामील करवाकर आगामी 7 फरवरी को कोर्ट में पेश कराने के आदेश दिए हैं।
आईपीएस भजनीराम मीणा तेरह साल पहले 2003 में मुजफ्फरनगर के एसएसपी थे, तभी उनके खिलाफ कोर्ट में एक वाद दायर हुआ था। यह मुकदमा वर्तमान में यहां अपर मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट जितेंद्र सिंह की कोर्ट संख्या 2 में विचाराधीन है। कोर्ट ने पहले कई बार मीणा को तलब किया, मगर वे कोर्ट में पेश नहीं हुए। गत 1 दिसंबर को तारीख पर कोर्ट में पेश नहीं होने पर अदालत ने मीणा के खिलाफ गैर जमानती वारंट जारी कर 2 जनवरी की तारीख लगाई थी।
इस संबंध में प्रदेश के डीजीपी को भी पत्र लिखा था। बावजूद मीणा इस बार भी कोर्ट में पेश नहीं हुए। कोर्ट ने उन्हें एक सप्ताह समय भी दिया, मगर वे अदालत में नहीं पहुंचे, जिस पर अदालत ने फिर से मीणा के खिलाफ एनबीडब्ल्यू जारी कर दिए है। अदालत ने इस बार प्रदेश के प्रमुख सचिव गृह के अलावा डीजीपी को भी पत्र भिजवाया है। जिसमें दोनों को आदेश दिया है कि वह अभियुक्त आईपीएस भजनीराम मीणा को वारंट तामील करवा कर 7 फरवरी को कोर्ट में पेश कराएं, ताकि वाद की कार्रवाई आगे बढ़ाई जा सके। वर्तमान में मीणा मुरादाबाद पीटीएस में आईजी है।
यह था मामला
मुजफ्फरनगर। आईपीएस भजनीराम मीणा तेरह साल पहले वर्ष 2003 में मुजफ्फरनगर के एसएसपी थे। उसी दौरान कसबा भोकरहेड़ी निवासी अजय कुमार गुप्ता शस्त्र लाइसेंस के लिए अपनी फाइल को अग्रसरित करवाने के लिए तत्कालीन एसएसपी भजनीराम मीणा के पास उनके कार्यालय में गए थे। आरोप है कि एसएसपी ने उनके साथ गाली गलौच करते हुए अभद्र व्यवहार किया तथा जान से मारने धमकी देकर झूठे मामले में भेज भिजवाने की धमकी दी थी।
पीड़ित अजय कुमार गुप्ता ने अपने अधिवक्ता ज्ञान कुमार के जरिए सीजेएम कोर्ट में एसएसपी के खिलाफ परिवाद दायर किया, जिसे कोर्ट ने 14 जुलाई 2003 को स्वीकार करते हुए एसएसपी भजनीराम मीणा के खिलाफ धारा 352, 504, 506 के तहत मुकदमा दर्ज किया था। तभी से यह मुकदमा कोर्ट में चल रहा है।
एक बार भी कोर्ट में नहीं हुए पेश
मीणा इस मुकदमे में एक बार भी कोर्ट में पेश नहीं हुए। जिस पर उनके खिलाफ पहले भी एनबीडब्ल्यू जारी हुआ था। मीणा ने हाईकोर्ट इलाहाबाद से एनबीडब्ल्यू के खिलाफ स्टे आर्डर ले लिया। जिसकी जानकारी होने पर पीड़ित की ओर से उनके अधिवक्ता ने हाई कोर्ट में आपत्ति दायर की, जिसे हाई कोर्ट ने 15 दिसंबर 2010 को स्वीकार करते हुए मीणा के स्टे को खारिज कर दिया था। मगर हाई कोर्ट का यह आदेश बीते छह साल से फाइलों में दबा रहा।
इस दौरान पीड़ित के अधिवक्ता हाई कोर्ट के आदेश की इस फाइल को तलाशते रहे। आखिरकार उन्हें छह साल बाद 30 नवंबर 2016 को हाईकोर्ट का यह आदेश मिल गया। अधिवक्ता ज्ञान कुमार ने 1 दिसंबर को एसीजेएम कोर्ट संख्या दो में हाईकोर्ट के आदेश को पेश किया। जिस पर एसीजेएम जितेंद्र सिंह ने मुकदमे के अभियुक्त भजनीराम मीणा के खिलाफ गैर जमानती वारंट जारी किया था।