चेयरमैन पंकज अग्रवाल ने कहा कि मुझे असंवैधानिक तरीके से बर्खास्त किया गया था। डीएम डीके सिंह ने पहली दो रिपोर्ट में क्लीन चिट दे दी और बाद में बीजेपी नेताओं के दबाव में दोषी बता दिया। बिना हमारा पक्ष जाने नगरीय विकास मंत्री सुरेश खन्ना ने बीजेपी नेताओं के दबाव में बर्खास्त कर दिया। बीजेपी नेता अभी भी मेरे खिलाफ षड्यंत्र रच रहे हैं और मुझे किसी न किसी मामले में फंसाना चाहते हैं।
नगर पालिका सभागार में कांग्रेस और रालोद नेताओं की मौजूदगी में चेयरमैन पंकज अग्रवाल ने अपनी बर्खास्तगी का ठीकरा बीजेपी नेताओं पर फोड़ा। कहा कि बीजेपी नेताओं के आगे प्रशासनिक अधिकारी पंगु बने हुए हैं। शिकायतकर्ता खालिद को सत्ता पार्टी का एजेंट बताया। कहा कि बिना शपथपत्र दिए किसी शिकायत पर कार्रवाई नहीं हो सकती।
पूर्व जिलाधिकारी डीके सिंह ने जांच में तीन अलग-अलग रिपोर्ट दी। उन्होंने माना कि कोई आर्थिक हानि नहीं हुई। कुछ प्रक्रियात्मक त्रुटि थी। दबाव में तीसरी जांच में डीके सिंह ने मुझे दोषी बता दिया। जो भाजपा नेताओं ने कहा, वही लिखकर दे दिया। मुझे अपनी बात तक रखने का मौका नहीं दिया। शासन के सचिव ने अपनी रिपोर्ट में क्लीनचिट दे रखी है।
उन्होंने कहा कि यदि मैं दोषी हूं तो ईओ, डीएम और कमिश्नर कैसे बच गए। ये भी बराबर के दोषी हैं। विभागीय मंत्री ने अपनी पार्टी के नेताओं के दबाव में गैरकानूनी तरीके से बर्खास्तगी की कार्रवाई की। न्यायालय के आदेश से यह साबित भी हो गया।
नगर पालिका में 19 करोड़ का बजट स्वीकृत हुआ है, इस पर कुछ भाजपाइयों की नजर है। पूर्व सांसद हरेंद्र मलिक ने कहा कि हाईकोर्ट के आदेश से यह सिद्ध हो गया है कि बीजेपी सरकार की कार्रवाई गलत थी। कांग्रेस जिलाध्यक्ष नानू मियां, पूर्व जिलाध्यक्ष तेगबहादुर सैनी, रालोद जिलाध्यक्ष अजीत राठी, कांग्रेस महिला अध्यक्ष बिलकिस चौधरी, सुधीर भारतीय, सतीश गर्ग आदि मौजूद रहे।
मुझे मिल रही हैं धमकियां
चेयरमैन पंकज ने यह भी बताया कि कुछ लोग मुझे इस बात की भी धमकी दे रहे हैं कि वह प्रेस कांफ्रेंस न करें। विपक्षी मुझसे बौखलाए हुए हैं। मैं इन लोगों से डरने वाला नहीं हूं। अपने कामों को लेकर जनता के बीच जाऊंगा।