मुजफ्फरनगर। 15 साल पुराने हत्या के मुकदमे ने अपर जिला सत्र न्यायालय/पॉक्सो कोर्ट संख्या-2 के न्यायाधीश छोटे लाल यादव ने अभियुक्त को आजीवन कारावास और 21 हजार रुपये अर्थदंड की सजा सुनाई है। हत्यारोपी की पत्नी को साक्ष्यों के अभाव में बरी कर दिया।
डीजीस फौजदारी राजीव शर्मा एवं एडीजीसी किरनपाल कश्यप ने बताया पुलिस विवचेक ने अदालत में आरोप पत्र प्रेषित किया। एडीजे/ पॉक्सो एक्ट कोर्ट संख्या-2 में हत्या के मामले का परीक्षण हुआ। अभियोजन पक्ष की तरफ से एडीजीसी ने संबंधित 10 गवाह पेश किए। बचाव पक्ष के अधिवक्ता ने कई तर्क पेश किए।
दोनों पक्षों की तर्कों को सुनकर न्यायाधीश ने अभियुक्त सुरेश पर दोष सिद्ध कर दिया। हत्या के आरोप में आजीवन कारावास और 20 हजार अर्थदंड और शव छिपाने के आरोप में तीन साल एक हजार रुपये अर्थदंड की सजा सुनाई, जबकि पत्नी सुरेखा को संदेह का लाभ देते हुए दोषमुक्त कर दिया।
ये था मामला
शहर के इंद्रा कॉलोनी निवासी बलजोर सिंह ने सिविल लाइन थाने में मुकदमा दर्ज कराया था। घटना 31 मार्च वर्ष 2007 है। सिविल लाइन थाना क्षेत्र में वादी बलजोर अपने पुत्र के साथ मोहल्ले में दूध की डेयरी चलाता था। घटना के दिन उनके पुत्र नीरज को अभियुक्त सुरेश डेयरी से बुलाकर ले गया था। उसके बाद मालूम चला था कि उसके पुत्र की हत्या कर शव गायब कर दिया है। दो अप्रैल 2007 को मृतक नीरज का शव मल्हूपुरा पुलिया से बरामद हुआ था। मामले में सुरेश पुत्र हुकम चंद एवं सुरेखा पत्नी सुरेश निवासी गाजावाली के खिलाफ हत्या का मुकदमा चला।