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नरा में मकान धराशायी, मां-बेटे की मौत, मलबे में दबा पूरा परिवार

Mon, 30 Jul 2018 12:33 AM IST
ब्यूरो, अमर उजाला/मुजफ्फरनगर
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नरा गांव में पड़ा मकान का मलबा। - फोटो : अमर उजाला
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मंसूरपुर में पिछले चार दिन तक लगातार हुई तेज बारिश के चलते गांव नरा में शनिवार देर रात कच्चे मकान की छत भरभराकर गिर गई। जिसके मलबे में कमरे में सोया पूरा परिवार दब गया। जब तक ग्रामीण परिवार को मलबे से निकालते, मां-बेटे की मौत हो चुकी थी, जबकि गृहस्वामी और दो बेटियां गंभीर रूप से घायल थीं। घटना के बाद रविवार सुबह सांसद डॉक्टर संजीव बालियान प्रशासनिक अफसरों के साथ गांव में पहुंचे और पीड़ित परिवार को सांत्वना देने के साथ ही अफसरों को पीड़ित परिवार की अधिकाधिक सहायता करने के निर्देश दिए।
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मंसूरपुर क्षेत्र के गांव नरा निवासी अनिल प्रजापति (30) चाऊमीन बेचकर परिवार का पालन-पोषण करता है। उसके परिवार में पत्नी ललिता (28), पुत्र गगन (4) व दो बेटियां पूर्णिमा (3) व राखी (6) हैं। शनिवार रात पूरा परिवार कच्चे मकान में सोया हुआ था। देर रात करीब 11.30 बजे लगातार बारिश के चलते जर्जर हो चुकी कच्ची छत नीचे सोए परिवार पर गिर गई, जिसमें पूरा परिवार भारी भरकम मलबे में दब गया।

मलबे के नीचे दबे परिवार की चीख पुकार सुनकर पड़ोस के लोग मौके पर पहुंचे और कड़ी मशक्कत के बाद मलबा हटाकर पूरे परिवार को बाहर निकाला। इसके बाद रात में ही घायल परिवार को बेगराजपुर मेडिकल कॉलेज ले जाया गया, जहां चिकित्सकों ने ललिता व उसके बेटे गगन को मृत घोषित कर दिया। वहीं, अनिल, दोनों बच्चियों पूर्णिमा और राखी की हालत गंभीर बनी हुई है। मां-बेटे की मौत से परिवार में कोहराम मच गया। 
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सुबह हादसे की जानकारी मिलने पर पूर्व केंद्रीय मंत्री व सांसद डॉक्टर संजीव बालियान, एडीएम वित्त एवं राजस्व सियाराम मौर्य और एसडीएम सदर धर्मेंद्र ने गांव पहुंचकर पीड़ित परिवार से घटना की जानकारी ली। इस दौरान सांसद ने अफसरों को पीड़ित परिजनों की अधिकाधिक मदद करने के निर्देश दिए। हादसे में मां-बेटे की मौत से ग्रामीणों में हड़कंप मचा हुआ है। उधर, पोस्टमार्टम के बाद मां-बेटे के शव गांव ले जाए गए, जहां गमगीन माहौल में उनका अंतिम संस्कार कर दिया गया। 

पीड़ित परिवार को सौंपे 8.95 लाख धनराशि के चेक 
एडीएम वित्त एवं राजस्व सियाराम मौर्य ने बताया कि शासन के निर्देशानुसार ललिता व उसके बेटे गगन की मौत पर आश्रित परिवार को चार-चार लाख रुपये का और मकान क्षतिपूर्ति के लिए 95 हजार रुपये की धनराशि का चेक सौंप दिया गया है। हलका लेखपाल रणबीर सिंह ने ग्राम प्रधान वीरेंद्र सैनी की मौजूदगी में पीड़ित परिवार को आर्थिक सहायता राशि के चेक सौंपे।

शेरपुर में मकान गिरा, पांच पशुओं की मौत 
मुजफ्फरनगर। चार दिन तक बारिश की झड़ी के बाद रविवार को चटकती धूप निकलने के बावजूद कच्चे मकान गिरने का सिलसिला जारी रहा। गांव शेरपुर में मकान गिरने से जहां ग्रामीण के पांच पशु मलबे में दबकर मर गए। वहीं, मोहल्ला जसवंतपुरी में विकलांग के मकान की छत गिर गई।

शहर कोतवाली क्षेत्र के गांव शेरपुर निवासी हासरून पत्नी अय्यूब का कच्चा मकान चार दिन से लगातार हो रही बारिश के कारण पूरी तरह से जर्जर हो चुका था। परिजन मकान से निकलकर बाहर छप्पर डालकर रह रहे थे, जबकि उक्त मकान में उन्होंने अपने पशु दो भैंस व तीन बकरे बांध दिए थे।

रविवार तड़के हासरून का उक्त जर्जर कच्चा मकान अचानक तेज आवाज के साथ धराशायी हो गया, जिसके चलते उसमें बंधे पांचों पशु मलबे के नीचे दब गए। शोर मचाने पर आसपास के ग्रामीणों ने कड़ी मशक्कत के बाद मलबा हटाकर पशुओं को निकाला, लेकिन तब तक दोनों भैंस व तीनों बकरों की मलबे में दबकर मौत हो चुकी थी।

उधर, शहर के मोहल्ला जसवंतपुरी में भी शनिवार देर रात दिव्यांग रईस के मकान की छत गिर गई। हादसे में बल्ली सिर में लगने से रईस गंभीर रूप से घायल भी हो गया, जिसे तत्काल जिला अस्पताल ले जाकर उपचार दिलाया गया। इसके अलावा, गांव कल्लरपुर में शनिवार को तेज बारिश के बीच खाली पड़ा एक मकान गिर गया। हालांकि परिवार के कहीं बाहर रहने के चलते इससे किसी तरह की जन-धन की हानि नहंीं हुई। 

लगातार बारिश से सड़केें हुई तालाब में तब्दील 
रोहाना। चार दिन तक लगातार हुई बारिश से रोहाना की सड़कें तालाब में तब्दील हो गईं हैं। आलम यह है कि पानी की निकासी नहीं होने के कारण गंदा पानी ग्रामीणों के घरों में भरने लगा है। ग्रामीणों के अनुसार, गांव का पानी नालियों के रास्ते पूर्व प्रधान नफीस के मकान के पास स्थित तालाब में जाता है,

जहां से अंग्रेजी शासन काल के बने अंडरग्राउंड तालाब से पानी काली नदी में चला जाता है। वर्तमान में तालाब में नया नाला बनाये जाने से पानी की निकासी नहीं हो पा रही है, जिसके चलते लोगों के घरों के साथ ही गांव की मेन रोड पर भी पानी भरा हुआ है। गांव निवासी राजबीर, राकेश, सुशील, राजपाल व सलेकचंद का कहना है कि तालाब में नाले की जरूरत नहीं है, इसलिए नाला निर्माण बंद कराया जाना चाहिए।
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