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Muzaffarnagar News: हथियारों की फर्जी बरामदगी के मामले में सुनवाई पूरी, 15 मई को फैसला

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रामपुर तिराहा कांड की सीबीआई बनाम बृज किशोर की पत्रावली
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आंदोलनकारियों पर फर्जी प्राथमिकी दर्ज, सीबीआई की जांच में खुला था खेल


मुजफ्फरनगर। रामपुर तिराहा कांड में 32 साल बाद सीबीआई बनाम बृज किशोर की पत्रावली पर सुनवाई पूरी हो गई है। तत्कालीन एसओ झिंझाना समेत तीन पुलिसकर्मियों पर आंदोलनकारियों से फर्जी हथियार बरामद करने का आरोप है। अपर मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम/विशेष न्यायालय सीबीआई के पीठासीन अधिकारी देवेंद्र सिंह फौजदार ने फैसले के लिए 15 मई नियत कर दी है।
एक अक्टूबर 1994 को तत्कालीन एसओ झिंझाना ब्रज किशोर ने सिपाही अनिल कुमार, उमेश कुमार, कमल किशोर के साथ रामपुर तिराहा पर बसों की चेकिंग की थी। आंदोलनकारियों के खिलाफ तमंचे और खुखरी बरामदगी का मामला छपार थाने में दर्ज कराया। सीबीआई ने मामले की जांच शुरू की। पुलिस की ओर से बरामद दिखाए गए तमंचों को फोरेंसिक लैबोरेटरी में जांच के लिए भेजा गया।
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जांच में सामने आया कि साथ भेजे गए कारतूस उन तमंचों से नहीं चलाए गए थे। इसके बाद सीबीआई ने चारों आरोपियों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कराया। वाद के दौरान कमल किशोर की मृत्यु हो गई। इससे उनके विरुद्ध कार्रवाई बंद कर दी गई। सीबीआई ने न्यायालय में 17 गवाह प्रस्तुत किए हैं। आरोपियों पर धारा 182, 211, 218 और 120बी में प्राथमिकी दर्ज किया गया था।

यह हथियार दिखाए थे बरामद
पुलिस ने आंदोलनकारियों की बसों से दो तमंचे और छह कारतूस 12, एक तमंचा और दो कारतूस 315 बोर को बरामद दिखाए थे। साथ ही एक खुखरी मिलने का दावा किया था।

दो साल पहले आया था पहला फैसला
रामपुर तिराहा कांड की सीबीआई बनाम मिलाप सिंह की पत्रावली में 18 मार्च 2024 को फैसला आया था। सामूहिक यौन उत्पीड़न, लूट और अन्य धाराओं के प्राथमिकी में एटा के सिपाही मिलाप सिंह और सिद्धार्थनगर वीरेंद्र सिंह को आजीवन कारावास की सजा सुनाई गई थी।

ये था मामला
एक अक्टूबर, 1994 को अलग राज्य की मांग के लिए देहरादून से बसों में सवार होकर आंदोलनकारी दिल्ली के लिए निकले थे। देर रात रामपुर तिराहा पर पुलिस ने आंदोलनकारियों को रोकने का प्रयास किया। आंदोलनकारी नहीं माने तो पुलिसकर्मियों ने फायरिंग कर दी। इसमें सात आंदोलनकारियों की मौत हो गई थी। सीबीआई ने मामले की जांच की और पुलिसकर्मियों और अधिकारियों पर प्राथमिकी दर्ज कराए थे।
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रामपुर तिराहा पर ये हुए थे शहीद



रविंद्र रावत उर्फ गोलू, नेहरू कॉलोनी

सतेंद्र चौहान, भालावाला
गिरीश भद्री, बदरीपुर
राजेश लखेड़ा, अजबपुर
सूर्यप्रकाश थपलियाल ऋषिकेश

अशोक कुमार, ऊखीमठ
राजेश नेगी, भानियावाला

इन मामलों में सुनवाई...यह फाइल बंद
रामपुर तिराहा कांड की तीन पत्रावलियों पर सुनवाई चल रही है। सेशन कोर्ट में सीबीआई बनाम राधा मोहन द्विवेदी के अलावा मजिस्ट्रेट कोर्ट में सीबीआई बनाम बृज किशोर और सीबीआई बनाम एसपी मिश्रा की पत्रावली में सुनवाई चल रही है। उधर, जीडी (जनरल डायरी) फाड़कर उसके स्थान पर झूठा साक्ष्य गढ़ने के आरोप के मामले में दो अलग-अलग प्राथमिकी की फाइल बंद हो गई थी। एसीजेएम प्रथम की कोर्ट में सीबीआई बनाम राजेंद्र सिंह की फाइल चल रही थी। आरोपी तत्कालीन एसओ राजबीर सिंह, पुलिसकर्मी प्रीतम सिंह, दाताराम और राजेंद्र सिंह की मौत हो चुकी है। पिछले साल ही सीबीआई ने मृत्यु आख्या अदालत में पेश की थी। इसके बाद दोनों पत्रावलियां बंद कर दी गई थी।
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